ब्लड प्रेशर वह फोर्स है जो दिल के पूरे शरीर में खून पंप करने पर आर्टरी की दीवारों पर लगता है।

सिस्टोलिक प्रेशर दिल की धड़कन के दौरान आपकी आर्टरी में प्रेशर को बताता है। डायस्टोलिक प्रेशर वह प्रेशर है जब दिल धड़कनों के बीच आराम की स्थिति में होता है।

इस आर्टिकल में, आप ब्लड प्रेशर के प्रकार और उससे जुड़े कारकों के बारे में जानेंगे।

ब्लड प्रेशर के प्रकार

हाइपरटेंशन:

हाइपरटेंशन तब होता है जब आर्टरी की दीवारों पर खून का फोर्स बहुत ज़्यादा होता है। नतीजतन, इससे दिल की बीमारी और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

हाइपरटेंशन दो तरह का होता है।

A) प्राइमरी हाइपरटेंशन:

यह हाइपरटेंशन का सबसे आम प्रकार है और यह धीरे-धीरे समय के साथ विकसित होता है।

B) सेकेंडरी हाइपरटेंशन:

यह किसी अंदरूनी बीमारी के कारण होता है, जैसे किडनी की बीमारी या हार्मोनल असंतुलन।

हाइपोटेंशन:

हाइपोटेंशन एक ऐसी स्थिति है जिसमें आर्टरी की दीवारों पर खून का लगातार फोर्स कम होता है। इससे ऐसे लक्षण हो सकते हैं,

🔸चक्कर आना,

🔸 बेहोशी, और

🔸थकान।

ब्लड प्रेशर से जुड़े कारक

👉 लंबे समय तक रहने वाली स्वास्थ्य समस्याएं:

पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं जैसे,

🔸 किडनी की समस्याएं

🔸 हाई ब्लड शुगर

🔸 नींद की समस्याएं।

ये पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं हाइपरटेंशन के जोखिम कारकों को बढ़ा सकती हैं। अगर आपके परिवार में ब्लड प्रेशर की हिस्ट्री रही है, तो आपको यह बीमारी होने का खतरा ज़्यादा है।

👉 ज़्यादा वज़न:

मोटापा ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है।

👉 अस्वास्थ्यकर भोजन:

ज़्यादा नमक, सैचुरेटेड और ट्रांस फैट खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। फल और सब्जियां न खाने से ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है।

👉 सुस्त जीवनशैली:

शारीरिक गतिविधि की कमी से हाइपरटेंशन हो सकता है।

👉 तनाव:

तनाव में रहने से हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है।

👉 उम्र:

यह देखा गया है कि अगर आपकी उम्र ज़्यादा है, तो आपकी उम्र बढ़े हुए ब्लड प्रेशर के लिए ज़िम्मेदार हो सकती है।

अंतिम विचार

अगर आप देखते हैं कि आपका ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है, तो इसे हल्के में न लें। सही इलाज के लिए तुरंत अपने हेल्थकेयर डॉक्टर से संपर्क करें।

 

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