
किसी भी महिला के लिए गर्भावस्था एक सबसे यादगार समय होता है। गर्भावस्था के दौरान न सिर्फ अपनी स्वास्थ्य और शरीर का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है बल्कि गर्भ में पल रहे गर्भात शिशु के भी स्वास्थ्य और पोषण की चिंता हर मां को करनी चाहिए।क्योंकि, गर्भावस्था के समय में जो भी पोषण मां द्वारा बच्चों के शरीर तक पहुंचता है वह उन्हें जीवन भर के लिए या तो स्वस्थ बनाने का कारक बनता है या फिर बीमार रखने की बुनियादी वजह।
गर्भावस्था के दौरान विटामिन-डी की कमी से बच्चे में अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है। गर्भावस्था में विटामिन-डी की कमी बच्चे के इम्यून सिस्टम को प्रभावित करती है।
इसके परिणामस्वरूप बच्चे की श्वसन क्षमता भी कमजोर हो सकती है। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि गर्भवती महिलाओं को अपनी डाइट में नियमित रूप से डेयरी उत्पाद और गाजर शामिल करना चाहिए।
विटामिन-डी की महत्ता
गर्भावस्था के दौरान विटामिन-डी की आवश्यकता कई कारणों से होती है। यह कैल्शियम और फास्फोरस के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है, जो बच्चे की हड्डियों और दांतों के विकास के लिए आवश्यक है।
इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं में विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा बैक्टीरियल वेजाइनिटिस के जोखिम को कम करती है।
यह भ्रूण को फेफड़ों की समस्याओं और अस्थमा जैसी इम्यून स्थितियों से भी बचाता है।
नवजात शिशुओं में कार्डियोवस्कुलर समस्याओं का खतरा भी कम होता है।
विटामिन-डी के प्रमुख स्रोत
शरीर में विटामिन-डी का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा धूप से प्राप्त होता है। शेष 5 प्रतिशत अंडे, वसा वाली मछली, फिश लिवर ऑयल, दूध, पनीर, दही और अनाज जैसे खाद्य पदार्थों से मिलता है।
विशेष सलाह
हर एक गर्भस्थ माँ को विशेष सलाह यही है कि अपने गर्भावस्था के समय वह जितना हो सके पौष्टिक खाना खाएं, अपने शरीर में किसी भी पोषक तत्व की कमी न होने दें। विटामिन डी की कमी उनके बच्चे को आजीवन अस्वस्थ रख सकती है इसका वह पूरा-पूरा ध्यान रखें। धूप में बैठे और विटामिन डी स्रोत वाले जितने भी खाद्य पदार्थ है उसे अपने भोजन में अवश्य से अवश्य शामिल करें।
अमृता कुमारी – नेशन्स न्यूट्रीशन क्वालीफाईड डायटीशियन डायबिटीज एजुकेटर, अहमदाबाद
