
जब भी हम सीढ़ियां चढ़ते हैं, हमारी ब्रीदिंग रेट बढ़ जाती है, यानी हमें सामान्य से तेज सांस लेनी पड़ती है। इस दौरान फेफड़ों को शरीर की मांसपेशियों तक ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी होती है। यह दोहराव वाली प्रक्रिया (lung efficiency) को मजबूत करती है।
जिन लोगों को COPD (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) या ILD (Interstitial Lung Disease) जैसी पुरानी फेफड़ों की समस्याएं होती हैं, उनके लिए सीढ़ियां चढ़ना खास तौर पर लाभकारी माना जाता है। ऐसे मरीजों में अक्सर , थकान और कम स्टेमिना की शिकायतें रहती हैं। नियमित रूप से कंट्रोल्ड तरीके से सीढ़ियां चढ़ने से कई फायदे मिलते हैं। जैसे-
:)) फेफड़ों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं
:)) शरीर ऑक्सीजन का उपयोग ज्यादा अच्छे से करने लगता है
:)) स्टेमिना और सहनशक्ति धीरे-धीरे बढ़ती है
:)) मरीजों को अपनी शारीरिक क्षमता पर दोबारा भरोसा लौटने लगता है
यही कारण है कि पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन में सीढ़ियां चढ़ना एक अहम हिस्सा होता है। कई मामलों में इसका उपयोग मरीज की फिटनेस जांचने के लिए भी किया जाता है, खासकर किसी बड़ी सर्जरी से पहले।
इन लोगों को बरतनी है सावधानी
अगर आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो सीढ़ियां चढ़ने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। विशेष रूप से-
गंभीर सांस की बीमारी वाले लोग
घुटने या से परेशान व्यक्ति
हार्ट डिजीज वाले मरीज
इन लोगों को अचानक से तेज या लंबे समय तक सीढ़ियां चढ़ना शुरू नहीं करना चाहिए। डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार सुरक्षित तरीके से एक्सरसाइज शुरू करने की सलाह दे सकते हैं।
खास सलाह
रोजाना कुछ मिनट की सीढ़ियां चढ़ने की आदत फेफड़ों को मजबूत बनाने, स्टेमिना बढ़ाने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। चाहे आप पूरी तरह स्वस्थ हों या किसी पुरानी सांस की बीमारी से जूझ रहे हों, नियमित और कंट्रोल तरीके से सीढ़ियां चढ़ना आपके लिए एक प्रभावी कार्डियोपल्मोनरी वर्कआउट साबित हो सकता है।
