मौसम के बदलने के साथ-साथ हमारे पेट का हाजमा भी अपनी स्थिति परिस्थिति को बदलता है और ऐसे में फूड प्वाइजनिंग का चांस बहुत ज्यादा होता है क्योंकि, मौसम बदलने के साथ ही कॉन्टेमिनेशन के चांसेस भी बढ़ जाते हैं और हमारी थोड़ी सी लापरवाही और अनियमित हमें फूड प्वाइजनिंग से परेशान कर सकता है इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है।

फूड पॉइजनिंग एक ऐसी स्थिति है, जो बासी, बैक्टीरिया युक्त या दूषित भोजन के सेवन से उत्पन्न होती है। अक्सर इसे सामान्य पेट की समस्या समझकर नजरअंदाज किया जाता है, लेकिन यह लापरवाही शरीर में डिहाइड्रेशन और अंगों की विफलता का कारण बन सकती है।

जब ई-कोलाई, साल्मोनेला या लिस्टेरिया जैसे सूक्ष्मजीव हमारे पाचन तंत्र में प्रवेश करते हैं, तो ये जहरीले तत्व छोड़ते हैं, जिससे दस्त, तेज बुखार और उल्टी जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं।

 

♣ फूड पॉइजनिंग के कारण

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फूड पॉइजनिंग का मुख्य कारण भोजन पकाने, परोसने और स्टोर करने में की जाने वाली लापरवाहियां हैं। विशेष रूप से गर्म और नमी वाले मौसम में यह समस्या तेजी से फैलती है। खाने की स्वच्छता केवल बाहरी सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि भोजन को सही तापमान पर पकाया गया है या नहीं। इसलिए, इन जोखिमों को समझकर अपने किचन की आदतों में सुधार करना आवश्यक है।

 

♣ भोजन पकाने और स्टोर करने में गलतियां

 

फूड पॉइजनिंग का एक बड़ा कारण ‘क्रॉस-कंटैमिनेशन’ है। कई लोग उसी चॉपिंग बोर्ड या चाकू का उपयोग करते हैं, जिसका इस्तेमाल कच्चे मांस या सब्जियों के लिए किया गया था। इसके अलावा, खाने को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ना भी बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देता है। फ्रीजर में रखे खाने को बार-बार गर्म करने से भी टॉक्सिन्स उत्पन्न होते हैं।

 

♣ व्यक्तिगत स्वच्छता की कमी

 

हाथों की सफाई में लापरवाही भी फूड पॉइजनिंग का एक बड़ा कारण बन सकती है। खाना बनाने या खाने से पहले हाथों को साबुन से धोना आवश्यक है, अन्यथा कीटाणु सीधे आपके पेट में पहुंच सकते हैं। रसोई के कपड़ों और स्पंज की नियमित सफाई भी जरूरी है, क्योंकि इनमें भी लाखों बैक्टीरिया होते हैं, जो भोजन को दूषित कर सकते हैं।

 

♣ बाहर का खाना और अधपका भोजन

 

बाहर का खाना या स्ट्रीट फूड का सेवन करते समय स्वच्छता के मानकों का ध्यान न रखना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। कच्चे अंडे, अधपका मांस या बिना धुली सब्जियां ‘पैरासाइट्स’ का घर होती हैं। अधपके भोजन में बैक्टीरिया जीवित रह जाते हैं और शरीर के अंदर पहुंचकर तेजी से बढ़ते हैं। विशेष रूप से सी फूड और डेयरी उत्पादों के मामले में बासी भोजन जानलेवा साबित हो सकता है।

 

♣ सावधानी बरतना आवश्यक

 

फूड पॉइजनिंग से बचाव पूरी तरह से आपके हाथ में है। अक्सर स्वाद के चक्कर में हम स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए, ताजा भोजन का सेवन करें, कच्चे और पके भोजन को अलग-अलग स्टोर करें और रसोई के औजारों को साफ रखें। यदि संक्रमण के बाद लगातार तेज बुखार और उल्टी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आपकी थोड़ी सी सावधानी आपको अस्पताल के खर्च और शारीरिक कष्ट से बचा सकती है।

 

अमृता कुमारी – नेशन्स न्यूट्रीशन                                 क्वालीफाईड डायटीशियन                                       डायबिटीज एजुकेटर, अहमदाबाद

By AMRITA

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *