
हर जगह मौसम करवट ले रहा है। ठंड धीरे – धीरे पांव पसार रहा है। लोग बक्से में बंद ऊनी कपड़े, कंबल, रजाई और गर्म पोशाकें निकाल रहे हैं। वैसे तो सर्दियों का मौसम बड़ा सुहाना होता है, हल्की खिली धूप में अजीब सी शांति मिलती है। लेकिन जब सर्दी ज्यादा बढ़ जाती है तो इस ठंड से बचने के लिए हम ऊनी कपड़ों लं को बहुत लंबे समय तक पहन कर रखते हैं जिससे हमारी त्वचा पर बुरा असर भी पड़ता है।
ऊनी कपड़े से त्वचा पर जलन, खुजली और एलर्जी हो सकती है, खासकर संवेदनशील त्वचा वालों को। इससे शरीर का तापमान बढ़ सकता है और पसीना आ सकता है, जो त्वचा संबंधी समस्याएं जैसे रैशेज और इन्फेक्शन को बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा, ऊनी कपड़ों को लगातार पहनने से या पहनकर सोने से एग्जिमा और बालों का टूटना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं, और बीपी, डायबिटीज या अस्थमा जैसी स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
त्वचा संबंधी समस्याएं
जलन और खुजली: ऊनी कपड़ों के मोटे रेशे त्वचा से रगड़ खाने पर जलन और खुजली पैदा कर सकते हैं, खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में।
रैशेज और एक्जिमा: शरीर की गर्मी और पसीने के कारण त्वचा पर लाल दाने या चकत्ते (रैशेज) हो सकते हैं, जो एक्जिमा को बढ़ा सकते हैं।
ड्राई स्किन: ऊनी कपड़े त्वचा की नमी को सोख सकते हैं, जिससे त्वचा रूखी हो सकती है।
एलर्जी: कुछ लोगों को ऊन से एलर्जी भी हो सकती है, जिसके कारण गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं।
अन्य स्वास्थ्य जोखिम
शरीर का तापमान बढ़ना: ऊनी कपड़े शरीर की गर्मी को फँसा लेते हैं, जिससे शरीर की जरूरत से ज़्यादा गर्मी हो सकती है और नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
श्वसन संबंधी समस्याएं: कंबल या भारी ऊनी कपड़े से सिर ढककर सोने से ऑक्सीजन की कमी और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है, जिससे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
रक्त संचार में कमी: रात में ऊनी मोज़े पहनने से पैरों और तलवों के बीच रक्त संचार कम हो सकता है, जिससे झुनझुनी महसूस हो सकती है।
बालों का टूटना: ऊनी टोपियों से बालों में घर्षण और नमी की कमी से बालों का टूटना और दोमुंहे होना जैसी समस्या हो सकती है।
बीपी और डायबिटीज पर असर: ऊनी कपड़े पहनकर सोने से शरीर का तापमान बढ़ने के कारण ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीजों को जोखिम हो सकता है।
बचाव के उपाय
रात को सोने से पहले हल्के कॉटन के कपड़े पहनें।
त्वचा को मॉइस्चराइज़ करें और रात को सोने से पहले तिल का तेल लगा सकते हैं।
बहुत ज़्यादा गर्मी से बचने के लिए ऊनी मोज़े पहनकर सोने के बजाय कॉटन के मोज़े पहनें।
ऊनी कपड़ों को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धो लें और धूप में सुखा लें, इससे संक्रमण और फंगस की संभावना कम हो जाती है।
अमृता कुमारी – नेशन्स न्यूट्रीशन क्वालीफाईड डायटीशियन डायबिटीज एजुकेटर, अहमदाबाद
