
आज के समय में बच्चों की सेहत को लेकर माता-पिता पहले से कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे एनर्जेटिक और हर तरह से हेल्दी बढ़ें। इसके लिए वे बैलेंस डाइट, एक्सरसाइज और समय पर हेल्थ चेकअप पर ध्यान देते हैं लेकिन कई बार, बच्चों की डाइट में प्रोटीन की कमी रह जाती है। बच्चों में हो रहे निरंतर विकास के लिए प्रोटीन की प्रचूर अत्यधिक आवश्यक पोषक तत्वों में शामिल है।
प्रोटीन न सिर्फ मांसपेशियों और हड्डियों के विकास के लिए जरूरी है, बल्कि यह इम्यून सिस्टम, हार्मोन संतुलन और शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत के लिए भी अहम भूमिका निभाता है।
बच्चों में प्रोटीन की कमी के शुरुआती लक्षण
प्रोटीन केवल मसल्स बनाने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के संपूर्ण विकास, हार्मोन संतुलन और इम्यूनिटी के लिए भी जरूरी है। यह कोशिकाओं की मरम्मत करता है, नई कोशिकाओं का निर्माण करता है और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अगर बच्चे की डाइट में प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में नहीं है, तो उनका विकास धीमा हो सकता है।
शुरुआती दौर में के लक्षण अक्सर हल्के और नजरअंदाज किए जाने वाले होते हैं। जैसे कि बच्चे जल्दी थक जाते हैं, खेलों में भाग लेने में अनिच्छा होती है, बालों और प्रभावित होती है और बार-बार जुकाम या बुखार जैसी समस्याएं सामने आती हैं। यदि माता-पिता सतर्क रहें और इन संकेतों को समय रहते पहचानें, तो प्रोटीन की कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है।
¶. धीमा विकास
सबसे पहला संकेत यह होता है कि बच्चा अपनी उम्र के अनुसार लंबाई या वजन में पीछे रह जाता है। डॉक्टर डी. श्रीकांत बताते हैं कि छोटे बच्चों में यह रुकावट धीरे-धीरे नजर आती है, लेकिन समय रहते पहचानने पर इसे सुधारा जा सकता है।
¶. बार-बार कमजोरी और थकान
प्रोटीन की कमी से बच्चों में हो जाती है। वे जल्दी थक जाते हैं, खेलों या एक्टिविटी में भाग लेने में अनिच्छुक रहते हैं और छोटी-छोटी चीजों में भी थकान महसूस करते हैं।
¶. बालों और स्किन की समस्याएं
प्रोटीन की कमी से बाल टूटने लगते हैं, झड़ते हैं और बालों में चमक कम हो जाती है। स्किन भी रूखी और संवेदनशील हो सकती है। यह संकेत अक्सर माता-पिता अनदेखा कर देते हैं।
¶. इंफेक्शन और बीमारियों का खतरा
प्रोटीन इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है। इसके अभाव में बच्चे जल्दी बीमार पड़ते हैं, बार-बार जुकाम, बुखार या अन्य इंफेक्शन की समस्या सामने आती है।
¶. मसल्स और हड्डियों में कमजोरी
प्रोटीन की कमी से मसल्स कमजोर होते हैं। इसके कारण बच्चे आसानी से चोट खा सकते हैं और भी प्रभावित होती है।
♣ बच्चों में प्रोटीन की कमी का कारण
बच्चों में प्रोटीन की कमी का मुख्य कारण असंतुलित डाइट है। कई बच्चे फ्रूट्स और जूस पसंद करते हैं, लेकिन दाल, अंडा, दूध, पनीर, मांस या सोया जैसी प्रोटीन-रिच चीजें कम खाते हैं। इसके अलावा शाकाहारी बच्चों में सही प्रोटीन सोर्स न मिलने पर यह कमी जल्दी दिखने लगती है।
♣ डॉक्टर की सलाह :
♦ बच्चों को रोजाना प्रोटीन से भरपूर डाइट दें, जिसमें दालें, दूध, दही, पनीर, अंडा, मांस या सोया शामिल हों।
♦ नट्स, मूंगफली, चना या सोया स्नैक्स में शामिल कर सकते हैं। यह बच्चों को एनर्जी और प्रोटीन दोनों देता है।
♦ सिर्फ एक तरह का प्रोटीन देने की बजाय विभिन्न सोर्स से प्रोटीन दें। इससे बच्चा सभी जरूरी अमिनो एसिड्स प्राप्त करता है।
♦ अगर बच्चे की ग्रोथ धीमी लग रही है, बार-बार कमजोरी या बीमारियां हो रही हैं, तो तुरंत पीडियाट्रिशियन से सलाह लें।
खास बात:
कुल मिलाकर, बच्चों में प्रोटीन की कमी शुरुआती दौर में आसानी से पहचान की जा सकती है अगर माता-पिता सतर्क रहें। धीमा विकास, कमजोरी, बालों और स्किन की समस्याएं, बार-बार होने वाली बीमारियां, ये सभी संकेत होते हैं। पीडियाट्रिशियन डॉक्टर डी. श्रीकांत के अनुसार, बैलेंस्ड और प्रोटीन-रिच डाइट से इस कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है। समय रहते सही कदम उठाने से बच्चों का विकास सामान्य और हेल्दी रहता है।
अमृता कुमारी – नेशन्स न्यूट्रीशन क्वालीफाईड डायटीशियन डायबिटीज एजुकेटर, अहमदाबाद
