अक्सर हमने अपने आसपास किसी न किसी बच्चे को मिट्टी, चॉक दीवार की पपड़ी, शीशे का टुकड़ा,बर्फ का टुकड़ा या अपने बाल और नाखून खाते हुए देखा है। क्या आपने कभी सोचा है कि यह एक नॉर्मल चाइल्ड बिहेवियर है या किसी बीमारी का संकेत? जी हां अक्सर यह छोटे बच्चों से ही विकसित होता है और बड़ी उम्र तक यह आदत रहती है जिसे हम पिका डिसऑर्डर कहते हैं। कई बार यह पिका डिसऑर्डर जानलेवा भी साबित हुआ है क्योंकि अपनी इस आदत की वजह से बच्चे शीशे का टुकड़ा या कुछ ऐसी जहरीले पदार्थ भी अपने मुंह में रख लेते हैं जो उनके लिए मौत का कारण बन जाता है।

 

पिका (Pica) एक ऐसा विकार है जिसमें व्यक्ति मिट्टी, चॉक, साबुन, बर्फ, बाल जैसी गैर-खाद्य वस्तुएं बार-बार खाता है। यह बच्चों, गर्भवती महिलाओं और मानसिक रूप से बीमार लोगों में अधिक आम है। इसका इलाज आमतौर पर व्यवहार थेरेपी, पोषण संबंधी काउंसलिंग और अंतर्निहित कारणों को दूर करने के लिए दवा से किया जाता है।

 

पिका विकार के लक्षण :

 

♦ गैर-खाद्य पदार्थों का सेवन: कम से कम एक महीने तक मिट्टी, रेत, पेंट, बाल, बर्फ, चॉक, साबुन, कागज़ या कपड़े खाना।

♦ पेट की समस्याएं: पेट दर्द, कब्ज, दस्त, या पेट में मरोड़।

♦ जहरीले पदार्थ से संक्रमण: पेट में भारी धातु (जैसे लेड पॉइजनिंग) के लक्षण।

♦ मल में रक्त: अल्सर या आंतों की क्षति का संकेत।

 

पिका के कारण :

 

♣ पोषण की कमी: आयरन या जिंक की कमी (एनीमिया) पिका का एक प्रमुख कारण है।

♣ मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां: ऑटिज्म, बौद्धिक अक्षमता (Intellectual disability), या ओसीडी (OCD)।

♣ गर्भावस्था: कुछ गर्भवती महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण।

♣ तनाव और उपेक्षा: मानसिक तनाव या बाल उपेक्षा।

♣ सांस्कृतिक/व्यवहारिक कारण: कुछ संस्कृतियों में यह आम माना जा सकता है या आदत बन सकती है।

 

पिका का इलाज :

 

♦ व्यवहार थेरेपी (Behavioral Therapy): इसमें सकारात्मक सुदृढीकरण (Positive Reinforcement) के जरिए गैर-खाद्य वस्तुओं को खाने से रोकने की ट्रेनिंग दी जाती है।

♦ पोषण संबंधी सुधार: आयरन या कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए आहार में सुधार या सप्लीमेंट्स।

♦ वातावरण में बदलाव: घर से उन वस्तुओं (जैसे मिट्टी, चॉक) को दूर करना जिन्हें खाने की आदत है।

♦ दवा: यदि यह ओसीडी या ऑटिज्म से जुड़ा है, तो डॉक्टर विशेष दवाएं दे सकते हैं।

♦ चिकित्सा निगरानी: यदि निगली गई वस्तुएं जहरीली हों, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है।

 

खास बात :

यदि यह समस्या एक महीने से अधिक समय तक बनी रहती है, तो तुरंत किसी बाल रोग विशेषज्ञ या मनोरोग विशेषज्ञ से परामर्श करें।

 

अमृता कुमारी – नेशन्स न्यूट्रीशन                             क्वालीफाईड डायटीशियन ,डायबिटीज एजुकेटर      अहमदाबाद

By AMRITA

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