
बच्चों के जनम से ही उनके स्वास्थ्य, पोषण और सही विकास की चिंता बनी रहती है। हमारी एक लापरवाही से उनके स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है और फिर इसके लिए न्यूट्रीशन सप्लीमेंट देने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं किस उम्र के बच्चे को कौन सी सप्लीमेंट दी जानी चाहिए।
बच्चों को सप्लीमेंट्स (Supplements) देने का निर्णय उनकी उम्र, पोषण संबंधी जरूरतों और उनके खान-पान की आदतों जैसे कि वे ठीक से खाना खाते हैं या नहीं पर निर्भर करता है। डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को कोई भी सप्लीमेंट नहीं देना चाहिए।
उम्र के अनुसार मुख्य सप्लीमेंट्स की खुराक
1. नवजात से 1 साल तक (Infants)
विटामिन D (Vitamin D): जन्म से लेकर 1 साल तक बच्चों को विटामिन D की बूंदें (drops) अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए, खासकर यदि वे स्तनपान (breastfed) कर रहे हैं, क्योंकि धूप से उन्हें पर्याप्त मात्रा में यह नहीं मिल पाता है।
आयरन (Iron): 4-6 महीने की उम्र से डॉक्टर की सलाह पर आयरन सप्लीमेंट्स शुरू किए जा सकते हैं, विशेषकर उन बच्चों के लिए जो ठोस आहार (solid food) ठीक से नहीं खा रहे हैं।
2. 1 से 3 साल (Toddlers)
विटामिन D और कैल्शियम: इस उम्र में हड्डियों के विकास के लिए कैल्शियम और विटामिन D बहुत जरूरी है।
मल्टीविटामिन (Multivitamins): यदि बच्चा ठीक से खाना नहीं खा रहा है, तो डॉक्टर की सलाह पर बाल चिकित्सा मल्टीविटामिन दिया जा सकता है।
3. 3 से 5 साल (Preschoolers)
विटामिन A, C, और D: 6 महीने से 5 साल तक के बच्चों के लिए इन विटामिन्स की सिफारिश की जाती है।
जिंक (Zinc): बच्चों के समग्र विकास के लिए जिंक फायदेमंद है।
4. 6 से 12 साल (School-Age Children)
ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3s): यह मस्तिष्क के विकास और याददाश्त (focus) के लिए सहायक है।
आयरन और विटामिन B-Complex: बच्चों की सक्रिय दिनचर्या के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
5. 13-18 साल (Teenagers)
कैल्शियम और विटामिन D: यह तेजी से विकास (growth spurts) का समय होता है, इसलिए हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए इनकी अधिक आवश्यकता होती है।
आयरन: किशोर लड़कियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
कुछ महत्वपूर्ण बातें:
कृमिनाशक (Deworming): भारत में 1-19 साल के बच्चों के लिए साल में दो बार (10 फरवरी और 10 अगस्त) कृमिनाशक गोलियां (deworming tablets) दी जाती हैं।
डॉक्टर की सलाह: सप्लीमेंट तब ही दें जब बच्चों में पोषण की कमी हो (जैसे भूख कम लगना, कमजोर होना), अन्यथा संतुलित आहार सबसे अच्छा है।
