
अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स एंड गाएनेकोलॉजिस्ट की मानें, तो मिसकैरेज के बाद ब्लीडिंग होना नॉमर्ल होता है। कुछ महिलाओं को तो 4 से 6 सप्ताह तक ब्लीडिंग हो सकती है। जैसे-जैसे बॉडी रिकवर हो जाती है, वैसे-वैसे ब्लीडिंग की समस्या कम हो जाती है। हां, अगर किसी महिला को मिसकैरेज होने के बाद हैवी ब्लीडिंग हो रही है, तो इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। क्योंकि यह इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। हालांकि, आपको हैवी ब्लीडिंग के साथ-साथ शरीर में नजर आ रहे अन्य लक्षणों पर भी गौर करना चाहिए, जैसे बुखार, ठंड लगना, पेट के निचले हिस्से में तीव्र दर्द होना आदि। ये सभी संकेत बताते हैं कि ये इंफेक्शन का संकेत हैं।
मिसकैरेज के बाद नजर आने वाले अन्य संकेत- Signs Of Infection After Miscarriage
तेज बुखार
अगर किसी महिला को 100°F से ज्यादा है, तो इस संकेत तो हल्के में न लें। यह भी संक्रमण की ओर इशारा करता है। दरअसल, कई बार महिला को प्रभावित हिस्से में सूजन हो जाती है और घाव में दर्द बढ़ जाता है। इसी वजह से शरीर में इंफ्लेमेशन हो जाती है, जो कि बुखार की वजह बनता है।
डिसचार्ज से गंध आना
जब महिला को मिसकैरेज के बाद इंफेक्शन होता है, तो ऐसे में उनके वजाइना से गंध भरी डिस्चार्ज निकलते हैं । असल में ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि टिश्यूज यूट्रस में रह जाते हैं या बैक्टीरिया यूटराइन कैविटी में एंटर कर जाते हैं। दोनों ही स्थितियां सही नहीं है।
असहज महसूस करना
मिसकैरेज होने पर महिला का शरीर रिकवर नहीं कर पाता है। इसके बजाय, शरीर बहुत थकान और कमजोरी महसूस करता है। इसके अलावा, बुखार और असहजता भी बनी रहती है।
मिसकैरेज के बाद इंफेक्शन होने पर क्या करें?
मिसकैरेज के बाद इंफेक्शन होने का रिस्क है या आपको ऐसा महसूस हो रहा है, तो बेहतर है कि आप अपनी स्थिति को इग्नोर न करें। डॉक्टर के पास जाएं और अपना इलाज करवाएं। साथ ही, शरीर में नजर आ रहे हर लक्षण पर गौर करें और सबका जिक्र डॉक्टर से करें। यही नहीं, डॉक्टर आपको जो-जो सलाह दें, सबको फॉलो करें। इससे न रिकवरी में मदद मिलेगी।
मिसकैरेज एक दुखद घटना है। इस तरह की घटना घटने के बाद जरूरी है कि आप अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें। समझने की कोशिश करें कि आपके शरीर में क्या-क्या हो रहा है और इसका ख्याल कैसे रखा जा सकता है? वैसे इस तरह की घटना न घटे, इसके लिए जरूरी है कि आप प्रेग्नेंसी को प्लान करें, डॉक्टर की सलाह लें और अपने सभी रेगुलर टेस्ट करवाएं। इससे हेल्दी प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ती है और इंफेक्शन का रिस्क कम होता है।
