डायबिटीज के कुछ मरीजों में शुगर लेवल बढ़ा हुआ रहता है. कई मामलों में तो दवाएं लेने के बाद भी कंट्रोल नहीं होता है. ऐसे में डॉक्टर दवा की डोज बढ़ाते हैं, लेकिन फिर भी आराम नहीं मिलता है.

ऐसे में जरूरी होता है कि आप एक बार अपना इंसुलिन रजिस्टेंस टेस्ट करा लें. ये टेस्ट क्या है. कैसे होता है और क्यों कराना चाहिए इस बारे में डॉक्टर से जानते हैं.

 

शुगर के मरीजों में इंसुलिन रजिस्टेंस की समस्या भी हो सकती है. ये तब होता है जब शरीर की सेल्स इंसुलिन के लिए ठीक से रिस्पॉन्ड नहीं करतीं, तो खून में ग्लूकोज जमा होने लगता है. इसको इंसुलिन रजिस्टेंस कहते हैं. इस समस्या भी दवाओं के साथ- साथ शुगर लेवल बढ़ने का कारण भी समझना पड़ता है.

 

क्या होता है इंसुलिन रेजिस्टेंस?

 

इंसुलिन एक हार्मोन है जो खून में मौजूद शुगर को शरीर की सेल्स तक पहुंचाता है. इस शुगर को ही शरीर एनर्जी के लिए यूज करता है, लेकिन

जब शरीर इंसुलिन के लिए ठीक तरीके से रिस्पांस नहीं करता है तो पैक्रियास जरूर के हिसाब से इंसुलिन नहीं बनाता है और इससे शुगर लेवल बढ़ने लगता है. जो कई मामलों में दवाओं से भी कंट्र्रोल नहीं होता है.

 

अगर किसी व्यक्ति का शुगर लेवल दवाओं से भी कंट्रोल नहीं हो रहा है तो उसको इंसुलिन रजिस्टेंस टेस्ट कराना चाहिए. इससे पता चल जाएगा कि शरीर में इंसुलिन रजिस्टेंस की समस्या तो नहीं है. इंसुलिन रेजिस्टेंस का पता लगाने के लिए फास्टिंग इंसुलिन टेस्ट और HOMA-IR टेस्ट किए जाते हैं.

 

क्यों जरूरी है यह जांच?

 

World Health Organization के मुताबिक समय रहते इंसुलिन रेजिस्टेंस टेस्ट करा लेते हैं तो इससे डायबिटीज मरीजों में शुगर लेवल को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है. इसकी मदद से डॉक्टर सही डाइट दवा और लाइफस्टाइल के बारे में मरीज को बता सकते हैं. इससे यह पता चल जाता है कि शुगर लेवल बढ़ने का कारण इंसुलिन रजिस्टेंस तो नहीं है. अगर ये है तो फिर इसके हिसाब से ही इलाज किया जाता है.

 

कैसे कम करें इंसुलिन रेजिस्टेंस?

 

रोज कम से कम 30 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करें

मीठा कम करें

रोज कम से कम 7 घंटे की नींद लें

मानसिक तनाव न लें

By AMRITA

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *