सोशल मीडिया का दिमाग पर गहरा और मिश्रित असर पड़ता है। यह डोपामाइन (dopamine) रिलीज कर ‘लाइक’ और कमेंट्स के जरिए खुशी और लत (addiction) पैदा करता है, जिससे ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो सकती है और बेचैनी बढ़ सकती है। अत्यधिक उपयोग से मानसिक तनाव, हीन भावना, नींद में कमी और मानसिक थकान (Brain Rot) हो सकती है, जबकि संयमित उपयोग से यह लोगों को जोड़ने और जानकारी पाने में सहायक भी है।

सोशल मीडिया के दिमाग पर मुख्य प्रभाव:

 

डोपामाइन लत (Dopamine Loop): हर नोटिफिकेशन या लाइक पर दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है, जो हमें बार-बार फोन चेक करने के लिए मजबूर करता है।

कमजोर फोकस और क्रिएटिविटी: लंबे समय तक रील या छोटे वीडियो देखने से याददाश्त, रचनात्मकता (creativity) और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता (attention span) कम हो सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर: दूसरों की “हाइलाइट रील” देखकर खुद की तुलना करने से हीन भावना, चिंता, अवसाद (depression) और अकेलेपन का अहसास बढ़ सकता है।

नींद और व्यवहार: रात में देर तक उपयोग से नींद की कमी होती है, जो चिड़चिड़ापन और याददाश्त को प्रभावित करती है।

बच्चों पर असर: बच्चों में सीखने की क्षमता कम होना और ADHD (ध्यान भटकने वाली बीमारी) जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।

 

संतुलित उपयोग के लिए परामर्श :

स्क्रीन टाइम सीमित करें: फोन का इस्तेमाल कम करें।

नोटिफिकेशन बंद करें: बार-बार फोन चेक करने से बचें।

टेक्नोलॉजी-मुक्त जोन: सोते समय और खाना खाते समय फोन का उपयोग न करें।

By AMRITA

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