भारत की प्रकृति आयुर्वेद और औषधि के लिए सर्वमान्य और विश्वव्यापी ख्याति में आता है.यहां ऐसी – ऐसी जड़ी बूटियां है जो न जाने कितने ही असाध्य रोगों को दूर करने और जड़ से खत्म करने में प्रभावशाली साबित हुए हैं.इनमें से ही एक है ‘कचनार’, जिसे आयुर्वेद में कायाकल्प का बेहतरीन विकल्प माना जाता है.

कचनार को आयुर्वेद में वामनोपगा कहा गया है, यानी यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में सहायक है. आज के समय में जब थायरॉइड, एसिडिटी, भूख की कमी और शरीर में गांठ जैसी समस्याएं आम हो गई हैं, ऐसे में कचनार एक घरेलू इलाज के रूप में उभरता है. आइए जानते हैं इसके फायदे, सेवन का तरीका और पहचान.

 

कचनार की पहचान

 

कचनार एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है. यह भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है और इसके पत्ते, फूल, छाल और जड़ सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं.

 

 

कचनार के बड़े फायदे 

 

1. थायरॉइड को बैलेंस करता है: चाहे हाइपरथायरॉइड हो या हाइपोथायरॉइड, कचनार शरीर के हॉर्मोन बैलेंस को सुधारता है और थायरॉइड ग्रंथि को सामान्य करता है.

 

2. पसीने की समस्या में राहत: कुछ लोगों को बहुत ज्यादा पसीना आता है, तो कुछ को बिल्कुल नहीं. कचनार इन दोनों स्थितियों को संतुलित करता है.

 

3. एसिडिटी और भूख की समस्या: अगर किसी को एसिड ज्यादा बनता है या भूख नहीं लगती, तो कचनार पाचन तंत्र को सुधारकर इन समस्याओं को दूर करता है.

 

4. शरीर में गांठ (गुल्म) को गलाता है: कचनार का सबसे बड़ा गुण है कि यह गांठों को पिघलाने में मदद करता है. चाहे वह कैंसर की गांठ हो, मेलिगनेंट या नॉन-मेलिगनेंट.

 

5. इम्यूनिटी और सूजन में लाभकारी: इसके सेवन से शरीर की इम्यूनिटी बढ़ती है और सूजन में भी राहत मिलती है.

 

कचनार के सेवन का सही तरीका 

 

कचनार के पत्तों को छाया में सुखाएं.

उन्हें पीसकर पाउडर बना लें.

रोजाना एक चम्मच पाउडर गुनगुने पानी या शहद के साथ लें.

चाहें तो कचनार का क्वाथ (काढ़ा) भी बना सकते हैं, छाल को उबालकर छान लें और सुबह-शाम सेवन करें.

नोट: सेवन से पहले आयुर्वेदाचार्य या डॉक्टर की सलाह लेना उचित रहेगा.

 

अलसी कचनार की पहचान कैसे करें?

 

इसके पत्ते दो भागों में विभाजित होते हैं, जैसे गाय के खुर.

फूल गुलाबी, बैंगनी या सफेद रंग के होते हैं.

छाल हल्की भूरे रंग की होती है और स्वाद में कसैली.

यह पेड़ आमतौर पर फरवरी से अप्रैल के बीच फूलता है.

कचनार एक ऐसा आयुर्वेदिक पौधा है जो शरीर के अंदर की असंतुलन को संतुलन में बदलने की क्षमता रखता है. चाहे थायरॉइड हो, भूख की कमी, एसिडिटी या गांठ, यह औषधि नेचुरल तरीके से शरीर को ठीक करने में मदद करती है. सही पहचान और सही सेवन से आप इसके गहरे लाभ उठा सकते हैं.

 

अमृता कुमारी – नेशन्स न्यूट्रीशन                              क्वालीफाईड डायटीशियन                                        डायबिटीज एजुकेटर, अहमदाबाद

By AMRITA

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