
आक (मदार) के पत्ते दर्द और सूजन के इलाज में अत्यंत प्रभावी हैं, विशेषकर गठिया, जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और मोच के लिए, क्योंकि इनमें कैलोट्रोपिन जैसे सूजनरोधी गुण होते हैं। इन्हें गर्म करके दर्द वाले स्थान पर बांधने से आराम मिलता है, यह सफर में उल्टी रोकने, पेट दर्द और घाव भरने में भी मददगार है।
आक के पत्ते के प्रमुख फायदे:
जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में राहत: आक की पत्तियों को हल्का गर्म करके, उस पर अरंडी या सरसों का तेल लगाकर जोड़ों या दर्द वाले हिस्से पर बांधने से सूजन और पुराने दर्द से आराम मिलता है।
गठिया में फायदेमंद: इसमें मौजूद सूजनरोधी गुण गठिया (Arthritis) के दर्द को कम करने में सहायक होते हैं।
सफर में उल्टी (Motion Sickness) से बचाव: यदि सफर के दौरान उल्टी आती है, तो आक के पत्ते को जूते/चप्पल के अंदर एड़ी के पास रखकर यात्रा करने से यह समस्या दूर हो सकती है।
घाव और संक्रमण में: आक के पत्तों का अर्क या लेटेक्स रोगाणुरोधी होता है, जो घाव को जल्दी भरने और संक्रमण रोकने में मदद कर सकता है।
पेट दर्द और कब्ज: पेट दर्द में इसके पत्तों की सिकाई करने से आराम मिलता है, और यह कब्ज व पाचन संबंधी समस्याओं में भी उपयोगी है।
त्वचा के लिए: इसके पत्ते एक्जिमा, सोरायसिस और चर्म रोगों में फायदेमंद माने जाते हैं।
सावधानी :
आक के पौधे से निकलने वाला दूध (लेटेक्स) जहरीला हो सकता है, इसलिए इसे आंखों और मुंह से दूर रखें। किसी भी तरह के औषधीय उपयोग से पहले, विशेषकर आंतरिक उपयोग, किसी योग्य चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श करना उचित है।
इस्तेमाल करने का तरीका (दर्द के लिए):
आक के पत्ते को पानी से अच्छी तरह धो लें।
उसे लोहे के तवे पर हल्का गर्म करें।
पत्ते पर सरसों या नारियल का तेल/हल्दी लगा सकते हैं।
इसे दर्द वाली जगह पर रखकर पट्टी या कपड़े से बांध लें
