
जब थायराइड बहुत कम या बहुत ज्यादा हार्मोन बनाने लगता है, तो शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि थायराइड की समस्या के शुरुआती संकेत अक्सर इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें तनाव, कमजोरी, उम्र बढ़ने या खराब लाइफस्टाइल से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, मूड में बदलाव या नींद की समस्या जैसी शिकायतें कई दूसरी स्थितियों में भी हो सकती हैं। इसलिए केवल लक्षण देखकर थायराइड की बीमारी मान लेना सही नहीं है।
लेकिन अगर शरीर में कई बदलाव एक साथ दिखाई दे रहे हैं, तो जांच करवाना जरूरी हो सकता है।
थायराइड आखिर करता क्या है थायराइड ?
🔹थायराइड गर्दन के सामने स्थित एक छोटी ग्रंथि है। यह मुख्य रूप से T4 और T3 जैसे हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन शरीर के ऊर्जा इस्तेमाल करने और कई अंगों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं।
🔹जब थायराइड पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाता तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है। इसके विपरीत, जब थायराइड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगता है तो इसे हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है।
दोनों स्थितियों के लक्षण एक-दूसरे से काफी अलग हो सकते हैं।
1. बिना वजह लगातार थकान
अगर पर्याप्त नींद लेने के बावजूद हर समय थकान महसूस होती है, तो इसे हमेशा सामान्य कमजोरी समझना सही नहीं है।
हाइपोथायरायडिज्म में शरीर की कई प्रक्रियाएं धीमी पड़ सकती हैं, जिसके कारण व्यक्ति को लगातार थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।
हालांकि थकान के पीछे एनीमिया, नींद की कमी, तनाव, संक्रमण और कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक बनी रहने वाली थकान की सही वजह जांच से ही पता चल सकती है।
2. वजन अचानक बढ़ना या कम होना
थायराइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं। हाइपोथायरायडिज्म में वजन बढ़ना एक आम लक्षण हो सकता है, जबकि हाइपरथायरायडिज्म में भूख ठीक रहने या बढ़ने के बावजूद वजन कम हो सकता है।
यही वजह है कि अगर खान-पान में कोई बड़ा बदलाव किए बिना वजन लगातार बदल रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
हालांकि वजन में बदलाव केवल थायराइड के कारण नहीं होता। डाइट, शारीरिक गतिविधि, तनाव और कई अन्य बीमारियां भी इसकी वजह हो सकती हैं।
3. ठंड या गर्मी सहन न होना
अगर पहले की तुलना में सामान्य मौसम में भी बहुत ज्यादा ठंड महसूस होने लगे, तो यह अंडरएक्टिव थायराइड से जुड़ा हो सकता है।
दूसरी ओर, हाइपरथायरायडिज्म में व्यक्ति को सामान्य से ज्यादा गर्मी लग सकती है और अत्यधिक पसीना आ सकता है।
अगर मौसम सामान्य होने के बावजूद तापमान सहन करने में लगातार परेशानी हो रही है और साथ में वजन या धड़कन में बदलाव भी हैं, तो थायराइड की जांच के बारे में डॉक्टर से बात की जा सकती है।
4. बाल झड़ना और त्वचा में बदलाव
हाइपोथायरायडिज्म में त्वचा रूखी हो सकती है और बाल सूखे या पतले हो सकते हैं। बाल झड़ने की शिकायत भी हो सकती है।
लेकिन बाल झड़ने के पीछे आयरन की कमी, तनाव, हार्मोनल बदलाव, पोषण की कमी और कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
इसलिए सिर्फ बाल झड़ने के आधार पर थायराइड की दवा शुरू करना बिल्कुल उचित नहीं है।
5. दिल की धड़कन में बदलाव
थायराइड हार्मोन का असर हृदय पर भी पड़ता है।
हाइपरथायरायडिज्म में दिल की धड़कन तेज या अनियमित हो सकती है और व्यक्ति को धड़कन महसूस होने लग सकती है।
दूसरी तरफ हाइपोथायरायडिज्म में हृदय की गति धीमी हो सकती है।
अगर अचानक दिल बहुत तेज धड़कने लगे, धड़कन अनियमित लगे, चक्कर आए या सीने में दर्द हो तो इसे केवल थायराइड मानकर घर पर इलाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों में चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
6. कब्ज या बार-बार मल त्याग
हाइपोथायरायडिज्म में पाचन तंत्र की गतिविधि धीमी होने के कारण कब्ज की समस्या हो सकती है।
इसके उलट हाइपरथायरायडिज्म में बार-बार मल त्याग या दस्त जैसी समस्या हो सकती है।
अगर पेट की समस्या लंबे समय से बनी हुई है और इसके साथ वजन या ऊर्जा में बदलाव भी हो रहा है, तो डॉक्टर से जांच की सलाह ली जा सकती है।
7. मूड और नींद में बदलाव
थायराइड हार्मोन में असंतुलन का असर मूड और नींद पर भी पड़ सकता है।
हाइपोथायरायडिज्म में उदासी, कम ऊर्जा और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है।
हाइपरथायरायडिज्म में बेचैनी, चिड़चिड़ापन, घबराहट और सोने में परेशानी हो सकती है।
हालांकि तनाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई अन्य स्थितियां भी इन लक्षणों का कारण हो सकती हैं। इसलिए जांच जरूरी है।
8. गर्दन में सूजन या गांठ
कभी-कभी थायराइड बढ़ने पर गर्दन के सामने सूजन या उभार दिखाई दे सकता है। इसे गोइटर कहा जाता है।
गर्दन में किसी तरह की नई गांठ या लगातार बढ़ती सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन उसकी चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
अगर निगलने या सांस लेने में परेशानी हो रही हो तो विशेष रूप से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
9. महिलाओं में पीरियड्स में बदलाव
थायराइड हार्मोन में असंतुलन महिलाओं के मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकता है।
हाइपोथायरायडिज्म में पीरियड्स ज्यादा या अनियमित हो सकते हैं और कुछ महिलाओं में प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्या भी हो सकती है।
इसलिए अगर पीरियड्स के पैटर्न में अचानक और लगातार बदलाव आया है तो केवल इसे तनाव या कमजोरी मानकर छोड़ना उचित नहीं है।
10. हाथों में कंपन और मांसपेशियों की कमजोरी
हाइपरथायरायडिज्म में हाथों में कंपन और मांसपेशियों की कमजोरी हो सकती है।
अगर हाथ अचानक कांपने लगें, दिल तेजी से धड़कता महसूस हो, वजन कम हो रहा हो और गर्मी ज्यादा लगने लगे तो डॉक्टर से थायराइड की जांच के बारे में बात करनी चाहिए।
थायराइड की जांच
थायराइड की समस्या की पुष्टि केवल लक्षणों के आधार पर नहीं की जाती। डॉक्टर आम तौर पर ब्लड टेस्ट की मदद लेते हैं।
TSH जांच अक्सर शुरुआती मूल्यांकन में महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा जरूरत के अनुसार T4, T3 और थायराइड एंटीबॉडी की जांच की जा सकती है।
कुछ मामलों में डॉक्टर गर्दन की जांच या इमेजिंग टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं।
अगर TSH असामान्य आता है तो आगे की जांच से यह समझने में मदद मिलती है कि थायराइड की समस्या किस प्रकार की है।
हर थायराइड समस्या का स्वरूप एक जैसा नहीं होता
कुछ स्थितियां लंबे समय तक चल सकती हैं, जबकि कुछ मामलों में थायराइड की समस्या अस्थायी भी हो सकती है। उदाहरण के लिए कुछ प्रकार की थायरॉयडाइटिस में पहले थायराइड हार्मोन ज्यादा हो सकते हैं और बाद में कम हो सकते हैं।
हाइपोथायरायडिज्म का इलाज अक्सर थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट दवा, जैसे लेवोथायरोक्सिन, से किया जाता है। इसकी खुराक डॉक्टर ब्लड टेस्ट के आधार पर तय करते हैं।
दवा की मात्रा खुद से बढ़ाना या कम करना सही नहीं है।
सिर्फ वजन बढ़ने से थायराइड मान लेना सही है?
बिल्कुल नहीं।
वजन बढ़ने के पीछे खान-पान, शारीरिक गतिविधि, नींद, तनाव, कुछ दवाएं और कई अन्य कारण हो सकते हैं। इसी तरह वजन कम होना भी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।
इसलिए केवल वजन के आधार पर थायराइड की दवा लेना खतरनाक हो सकता है।
थायराइड और प्रेग्नेंसी का क्या संबंध है?
गर्भावस्था के दौरान थायराइड की स्थिति पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। अनुपचारित हाइपोथायरायडिज्म गर्भावस्था में मां और बच्चे दोनों के लिए जटिलताओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
अगर कोई महिला गर्भवती है, गर्भधारण की योजना बना रही है या पहले से थायराइड की दवा ले रही है, तो डॉक्टर से नियमित फॉलो-अप करना महत्वपूर्ण है।
दवा की खुराक गर्भावस्था के दौरान बदलने की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए इसे खुद से बदलना नहीं चाहिए।
थायराइड की दवा कब और कैसे लें?
थायराइड की दवा लेने वाले मरीजों को डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना चाहिए। लेवोथायरोक्सिन की खुराक व्यक्ति की जरूरत के अनुसार तय की जाती है और समय-समय पर ब्लड टेस्ट के जरिए इसकी समीक्षा की जाती है।
गलत मात्रा लेने से भी समस्या हो सकती है। बहुत ज्यादा थायराइड हार्मोन लेने पर हृदय की धड़कन और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
इसलिए दवा बंद करना, शुरू करना या डोज बदलना डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
सबसे जरूरी बात
थायराइड की समस्या के लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं। लगातार थकान, वजन में बदलाव, ठंड या गर्मी सहन न होना, बाल झड़ना, त्वचा का रूखापन, कब्ज, दिल की धड़कन में बदलाव, गर्दन में सूजन और महिलाओं में पीरियड्स की गड़बड़ी जैसे संकेत दिखाई दें तो इन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
