हाईपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) तब होता है जब धमनियों में रक्त का दबाव लगातार सामान्य से अधिक बना रहता है।

हाईपरटेंशन होने के प्रमुख कारण

ज्यादा नमक खाना – अचार, पापड़, नमकीन, पैकेज्ड और फास्ट फूड में छिपा नमक भी। होटल का खाना में भी नमक का मात्रा जायदा रहने के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ जाता हैं जिस कारण हाइपरटेंशन होता हैं।

मोटापा और पेट की चर्बी – वजन बढ़ने से रक्तचाप बढ़ने का खतरा बढ़ता है।

तनाव और चिंता – लंबे समय तक मानसिक तनाव BP को बढ़ा सकता है।

व्यायाम की कमी – लगातार बैठे रहने और शारीरिक गतिविधि कम होने से जोखिम बढ़ता है।

धूम्रपान और तंबाकू – रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर BP बढ़ा सकते हैं।

शराब का अधिक सेवन – नियमित या ज्यादा मात्रा में शराब लेने से रक्तचाप बढ़ सकता है।

परिवार में इतिहास – माता-पिता या करीबी परिवार में हाई BP होने पर जोखिम अधिक हो सकता है।

किडनी की बीमारी – गुर्दे BP को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल – इनसे रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है।

उम्र बढ़ना – उम्र के साथ धमनियां कम लचीली होने से जोखिम बढ़ता है।

कुछ दवाइयां – कुछ दर्द की दवाएं, स्टेरॉयड, गर्भनिरोधक आदि कुछ लोगों में BP बढ़ा सकती हैं।

♦ नींद की समस्या, खासकर obstructive sleep apnea, भी एक कारण हो सकती है।

 

सबसे महत्वपूर्ण बात

कई लोगों में हाई BP बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रहता है। इसलिए केवल सिरदर्द या चक्कर होने का इंतजार नहीं करना चाहिए—BP की नियमित जांच जरूरी है।

अगर BP 180/120 mmHg या उससे ज्यादा आए और साथ में सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, कमजोरी/सुन्नपन, बोलने में दिक्कत या नजर में बदलाव हो तो यह आपात स्थिति हो सकती है और तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

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