
डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर की गहरी नसों में, आमतौर पर पैरों में, खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) जम जाता है।
यह तब होता है जब शरीर की किसी गहरी नस (deep vein), आमतौर पर पैरों में, रक्त का थक्का (blood clot) बन जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है क्योंकि यह थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है, जिससे पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।
🔴 डीप वेन थ्रोम्बोसिस के कारण (Causes)
नस के अंदर रक्त प्रवाह धीमा होने, नस में चोट लगने या खून के गाढ़े होने के कारण थक्का बनता है।
मुख्य कारण
लंबा गतिहीन समय: लंबी फ्लाइट, कार यात्रा या सर्जरी के बाद कई दिनों तक बिस्तर पर पड़े रहना।
नस में चोट: बड़ी सर्जरी, हड्डी टूटने (फ्रैक्चर) या किसी अन्य गंभीर शारीरिक आघात के कारण।
गर्भावस्था: पेट और पैरों की नसों पर दबाव बढ़ने से रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है।
हार्मोनल दवाएं: गर्भनिरोधक गोलियां (कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स) या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT)।
गंभीर बीमारियाँ: कैंसर, दिल की बीमारी (हार्ट फेलियर) या सूजन से जुड़ी बीमारियाँ।
मोटापा और धूम्रपान: अधिक वजन होना और तंबाकू का सेवन खून जमने का खतरा बढ़ाता है।
आनुवंशिकी (जेनेटिक्स): परिवार में पहले किसी को खून के थक्के जमने की बीमारी रही हो।
⚠️ डीप वेन थ्रोम्बोसिस के लक्षण :
DVT के लक्षण आमतौर पर केवल एक ही पैर में दिखाई देते हैं, हालांकि लगभग 50% मामलों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते.
सूजन: प्रभावित पैर, टखने या पिंडली (calf) में अचानक सूजन आना।
दर्द और ऐंठन: पैर में गंभीर दर्द या मरोड़ होना, जो अक्सर पिंडली से शुरू होता है।
त्वचा का रंग बदलना: प्रभावित हिस्से की त्वचा का लाल, पीला या हल्का नीला पड़ जाना।
गर्मी का अहसास: पैर का वह हिस्सा छूने पर बाकी शरीर की तुलना में अधिक गर्म महसूस होना।
🩺 डीप वेन थ्रोम्बोसिस का निदान
डॉक्टर शारीरिक जांच और मेडिकल इतिहास जानने के बाद निम्नलिखित परीक्षणों की सलाह देते हैं:
डुप्लेक्स वीनस अल्ट्रासाउंड: यह DVT का पता लगाने के लिए सबसे आम टेस्ट है। ध्वनि तरंगों की मदद से डॉक्टर नसों में रक्त के प्रवाह और थक्के की सटीक स्थिति देखते हैं।
डी-डाइमर टेस्ट (D-dimer Test): यह एक विशेष ब्लड टेस्ट है। यदि खून में डी-डाइमर प्रोटीन का स्तर सामान्य से अधिक आता है, तो यह शरीर में थक्का होने का संकेत देता है।
वेनोग्राफी (Venography): यदि अल्ट्रासाउंड से स्पष्ट न हो, तो पैर की नस में एक विशेष डाई (Dye) इंजेक्ट की जाती है और एक्स-रे के जरिए थक्के को देखा जाता है।
सीटी या एमआरआई स्कैन (CT / MRI Scan): पेट, पेल्विक हिस्से या फेफड़ों की नसों में छिपे थक्कों की जांच के लिए इन इमेजिंग स्कैन की मदद ली जाती है।
