बरसात खत्म होते ही हर घर में एक ही शिकायत सुनने को मिलती है – सर्दी, जुकाम, बुखार और खांसी। इसे आम भाषा में *मॉनसून फ्लू या बरसात वाला फ्लू* कहते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ये कोई नई बीमारी नहीं है, बल्कि मौसम बदलने से वायरस का हमला है।

 

बारिश के बाद फ्लू के 4 बड़े कारण

 

1. वायरस को नमी पसंद है: बारिश में हवा में 80% से ज्यादा नमी हो जाती है। इन्फ्लूएंजा और राइनो वायरस को ऐसी ही नमी में फैलने में मजा आता है।

 

2. इम्यूनिटी कमजोर होना: दिन भर उमस, फिर अचानक बारिश में भीग जाना, AC से निकलकर गर्मी में जाना – इससे हमारे शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत कम हो जाती है।

 

3. गंदा पानी और मच्छर: गली-मोहल्ले में जमा पानी, सीलन वाली जगह और भीड़-भाड़ में वायरस बहुत तेजी से एक से दूसरे में फैलता है।

 

4. खान-पान में गड़बड़ी:बरसात में बाहर का तला-भुना, चाट-पकौड़ी ज्यादा खाने से पेट खराब होता है और फ्लू जल्दी पकड़ लेता है।

 

लक्षण कैसे पहचानें?

 

– शुरू में छींक आना और नाक से पानी बहना

– गले में खराश, निगलने में दर्द होना

– सूखी या बलगम वाली खांसी

– 99 से 102 डिग्री तक हल्का बुखार

– पूरे शरीर में दर्द, सिर भारी होना, भूख न लगना

– बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होना

 

आमतौर पर ये फ्लू 4 से 5 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन खांसी 10-15 दिन तक बनी रह सकती है।

 

घरेलू इलाज – दादी माँ के नुस्खे जो सबसे ज्यादा काम करते हैं

 

 तुलसी-अदरक-काली मिर्च का काढ़ा:

8-10 तुलसी के पत्ते, थोड़ा अदरक, 4 काली मिर्च, 2 लौंग को 2 कप पानी में उबालें, जब आधा रह जाए तो शहद डालकर दिन में 2 बार पिएं।

 

भाप और गरारा:

एक बर्तन में गर्म पानी में विक्स या अजवाइन डालकर दिन में 2 बार भाप लें। रात में सोने से पहले गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारा जरूर करें।

 

हल्दी वाला दूध:

रात में सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी और चुटकी भर काली मिर्च पाउडर। इससे गले का इन्फेक्शन जल्दी ठीक होता है।

 

खान-पान का परहेज:

दही, केला, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, बाहर का तला-भुना बिल्कुल बंद। मूंग दाल की खिचड़ी, सूप, गुनगुना पानी और संतरा, मौसंबी जैसे विटामिन-C वाले फल खाएं।

 

इन गलतियों से बचें

 

– अपने मन से एंटीबायोटिक (जैसे Azithromycin) कभी मत खाइए। ये वायरल फ्लू है, बैक्टीरिया वाला नहीं।

– बुखार को मामूली समझकर बारिश में भीगना जारी न रखें।

– बच्चे को स्कूल और खुद ऑफिस में दूसरों के पास जाकर फ्लू न फैलाएं।

 

डॉक्टर के पास कब जाना जरूरी ?

 

– अगर बुखार 3 दिन से ज्यादा लगातार रहे

– बुखार 102 से ऊपर चला जाए और दवा से न उतरे

– सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो

– छोटा बच्चा, 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग, गर्भवती महिला या शुगर, BP, अस्थमा के मरीज को फ्लू हो

– उल्टी-दस्त के साथ बहुत कमजोरी आ जाए

 

*बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है*

 

1. बारिश में भीगने से बचें, भीग जाएं तो तुरंत सूखे कपड़े पहनें।

2. घर के आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें।

3. दिन में 4-5 बार साबुन से हाथ धोएं।

4. भीड़-भाड़ वाली जगह पर मास्क पहनें।

5. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए रोज 7 घंटे की नींद लें और योग-प्राणायाम करें।

 

 

By AMRITA

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