
पहले स्ट्रोक को अधिक उम्र की बीमारी माना जाता था लेकिन अब 35 से 50 वर्ष के पुरुषों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. लंबे समय तक ऑफिस में बैठकर काम करना, तनावपूर्ण जीवन, धूम्रपान, शराब का सेवन, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याएं पुरुषों में स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा रही हैं.
अगर स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों की समय रहते पहचान कर ली जाए तो समय रहता इलाज शुरू किया जा सकता है. भारत में युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के पुरुषों में स्ट्रोक के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. ऐसे में स्ट्रोक का खतरा कैसे बढ़ता है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं, जानिए यहां.
पुरुषों में स्ट्रोक का कारण
हाई ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज करना-
हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण है. कई पुरुष नियमित रूप से बीपी की जांच नहीं कराते और दवाइयां भी समय पर नहीं लेते. लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है.
धूम्रपान और तंबाकू-
सिगरेट और तंबाकू रक्त वाहिकाओं को संकरा कर देते हैं यानी वाहिनियां सिंकुड़ने लगती हैं और खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है जिससे स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ता है.
तनाव –
तनाव और अनियमित दिनचर्या, काम का दबाव, पर्याप्त नींद की कमी और लगातार मानसिक तनाव भी रक्तचाप बढ़ाते हैं और हृदय व मस्तिष्क दोनों पर नकारात्मक असर डालते हैं.
डायबिटीज और कॉलेस्ट्रोल –
डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल अनियंत्रित ब्लड शुगर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल धमनियों में रुकावट पैदा कर सकते हैं. इससे मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.
एक्टिव ना होना –
शारीरिक गतिविधि की कमी घंटों तक बैठकर काम करना, व्यायाम न करना और मोटापा भी स्ट्रोक के रिस्क फैक्टर्स में शामिल हैं.
पार्टनर से प्रेम की कमी-
कई बार पति-पत्नी या पार्टनर में प्रेम की कमी भी स्ट्रोक का बड़ा कारण बन जाते हैं। शारीरिक जरूरत और मानसिक सुकून ना मिलने की वजह से स्ट्रोक का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।
स्ट्रोक के शुरुआती संकेत कैसे पहचानें
♦चेहरे का एक तरफ झुक जाना
♦एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन
♦बोलने या शब्द समझने में कठिनाई
♦अचानक धुंधला दिखना या एक आंख से दिखाई न देना
♦चलने में संतुलन बिगड़ना या चक्कर आना, बिना कारण बहुत तेज सिरदर्द होना.
अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए. स्ट्रोक के इलाज में शुरुआती 4.5 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इस दौरान इलाज मिलने पर मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
किन पुरुषों को अधिक सावधान रहने की जरूरत है?
जिन पुरुषों की उम्र 40 साल से ज्यादा है, जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत है, डायबिटीज है, हाई कॉलेस्ट्रोल और मोटापे से परेशान हैं उन्हें स्ट्रोक आने का खतरा रहता है. इसके अलावा, तंबाकू का सेवन, धूम्रपान करना, परिवार में किसी को स्ट्रोक आया हो या फिर अनियमित धड़कन की दिक्कत हो उन्हें भी स्ट्रोक का खतरा रहता है.
