ईटिंग डिसऑर्डर (Eating Disorder) एक गंभीर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के खान-पान की आदतें असामान्य हो जाती हैं। इसके कारण व्यक्ति या तो बहुत कम खाने लगता है या जरूरत से ज्यादा खाने लगता है, जिसका सीधा असर उसके स्वास्थ्य पर पड़ता है।

 

 

आइए जानते हैं खान-पान के इस विकार के मुख्य कारण, लक्षण और इसके बचाव व उपचार।

1. ईटिंग डिसऑर्डर के मुख्य कारण (Causes)

ईटिंग डिसऑर्डर होने का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता, यह कई जैविक और सामाजिक कारकों का मिला-जुला परिणाम हो सकता है:

 

जैविक और आनुवंशिक कारण: यदि परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही हो, तो इसका जोखिम बढ़ जाता है। मस्तिष्क के रसायनों (न्यूरोट्रांसमीटर) का असंतुलन भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है।

मानसिक तनाव और भावनाएं: अत्यधिक मानसिक तनाव, कम आत्मसम्मान (Low Self-esteem), डिप्रेशन, या अपनी शारीरिक बनावट को लेकर हीन भावना होना।

सामाजिक और सांस्कृतिक दबाव: समाज या सोशल मीडिया द्वारा “पतले या परफेक्ट दिखने” के दबाव के कारण लोग डाइटिंग के चक्र में फंस जाते हैं।

वजन को लेकर प्रताड़ना: बचपन या किशोरावस्था में वजन या शारीरिक बनावट को लेकर दोस्तों या परिवार द्वारा टोकना या चिढ़ाना।

 

 

2. ईटिंग डिसऑर्डर के लक्षण (Symptoms)

लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति को किस प्रकार का ईटिंग डिसऑर्डर है। इसके प्रमुख प्रकारों के आधार पर लक्षण निम्नलिखित हैं:

 

एनोरेक्सिया नर्वोसा (Anorexia Nervosa) – बहुत कम खाना:

 

♦ वजन बढ़ने का अत्यधिक डर होना।

♦ खुद को सामान्य या कम वजन होने पर भी मोटा समझना।

♦ भोजन छोड़ने का बहाना बनाना या बेहद कम कैलोरी लेना।

♦ शरीर का वजन बहुत तेजी से कम होना और हड्डियां दिखाई देना।

 

बुलिमिया नर्वोसा (Bulimia Nervosa) – खाकर उल्टी करना:

♦ एक बार में बहुत अधिक खाना (Binge eating) और फिर नियंत्रण खो देना।

♦ वजन बढ़ने से रोकने के लिए जबरन उल्टी करना या जुलाब (Laxatives) का उपयोग करना।

♦ खाने के तुरंत बाद बार-बार वॉशरूम जाना।

♦ दांतों में खराबी या संवेदनशीलता होना (उल्टी के एसिड के कारण)।

 

बिंज ईटिंग डिसऑर्डर (Binge Eating Disorder) – अत्यधिक खाना:

♦ बिना भूख के भी बहुत कम समय में बहुत अधिक मात्रा में खाना।

♦ पेट पूरी तरह या असहज रूप से भरने तक खाते रहना।

♦ छुपकर या अकेले में खाना और बाद में अपराधबोध या शर्म महसूस करना।

 

 

3. ईटिंग डिसऑर्डर के उपाय और उपचार 

ईटिंग डिसऑर्डर से पूरी तरह उबरने के लिए चिकित्सकीय और मानसिक सहायता की आवश्यकता होती है:

 

 

मनोचिकित्सा: इसके उपचार में कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) बेहद कारगर है। यह थेरेपी मरीज की खान-पान और शरीर को लेकर नकारात्मक सोच को बदलने में मदद करती है।

पोषण संबंधी परामर्श : एक रजिस्टर्ड डायटीशियन की मदद से सही डाइट प्लान तैयार किया जाता है, जो शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने और स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करता है।

दवाइयां : यदि ईटिंग डिसऑर्डर का कारण डिप्रेशन या एंग्जायटी (चिंता) है, तो डॉक्टर की सलाह पर एंटी-डिप्रेसेंट दवाइयों का उपयोग किया जा सकता है।

पारिवारिक सहयोग : परिवार के सदस्यों को मरीज के व्यवहार को समझने की जरूरत है। उन्हें वजन पर टोकने के बजाय भावनात्मक रूप से सपोर्ट करना चाहिए।

तनाव प्रबंधन और ध्यान: योग, मेडिटेशन और नियमित हल्की एक्सरसाइज के जरिए मानसिक तनाव को कम करना चाहिए ताकि इमोशनल ईटिंग की आदत पर काबू पाया जा सके।

 

यदि आप या आपके किसी जानने वाले में ऐसे लक्षण दिख रहे हैं, तो बिना झिझक किसी मनोचिकित्सक (Psychiatrist) या थेरेपिस्ट से संपर्क करें। शुरुआती दौर में इलाज मिलने से व्यक्ति जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है।

By AMRITA

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