
भारत की हेल्थ से जुड़ी तस्वीर तेजी से बदल रही है। एक समय जहां देश में संक्रामक बीमारियां (जैसे डेंगू, मलेरिया, टीबी) सबसे बड़ी चुनौती थीं, वहीं अब स्थिति उलटती नजर आ रही है।
हालिया सर्वे के मुताबिक देश में लाइफस्टाइल यानी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का तेजी से विस्तार हो रहा है, जबकि संक्रामक रोगों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। यह बदलाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि भारत की बदलती जीवन शैली, खान पान और शहरीकरण की कहानी भी कहता है। आइए जानते हैं कैसे बदल रही भारत में सेहत की तस्वीर…
रिपोर्ट के आंकड़े
भारत की स्वास्थ्य तस्वीर एक बड़े बदलाव से गुजर रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistics Office) के लेटेस्ट देशव्यापी सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि देश में अब संक्रामक रोगों की तुलना में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। यह बदलाव न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चेतावनी है, बल्कि लोगों की बदलती दिनचर्या और जीवन शैली का स्पष्ट संकेत भी है।
हृदय और मेटाबॉलिक बीमारियों में तेज उछाल
सर्वे के अनुसार साल 2025 में 25.6% लोगों ने हृदय संबंधी बीमारियों की शिकायत की, जबकि 2017-18 में यह आंकड़ा सिर्फ 16.7% था। यह वृद्धि बेहद तेज मानी जा रही है और हेल्थ विशेषज्ञ इसे बदलती जीवनशैली, तनाव और असंतुलित खानपान से जोड़कर देख रहे हैं।
इसी तरह मेटाबॉलिक और अंतःस्रावी (metabolic & endocrine) बीमारियों में भी बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। साल 2025 में 24.2% लोगों ने ऐसी बीमारियों की सूचना दी, जबकि पहले यह आंकड़ा लगभग 15% था। ये बीमारियां विशेष रूप से 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अधिक पाई गई हैं, जो तेजी से बदलती जीवन शैली के प्रभाव को और स्पष्ट करती हैं।
संक्रमण के मामलों में गिरावट
इस ताजा सर्वे के मुताबिक, संक्रमण संबंधी बीमारियों में गिरावट आई है। साल 2025 में केवल 15% लोगों ने बुखार, पीलिया और दस्त जैसी बीमारियों का अनुभव बताया, जबकि 2017-18 में यह आंकड़ा 32% था। यह गिरावट बेहतर साफ-सफाई की आदत, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का नतीजा मानी जा रही है। हालांकि यह राहत सभी आयु वर्गों में समान नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि 14 वर्ष तक की उम्र के बच्चों में अब भी आधे से अधिक बीमारियां संक्रमण से जुड़ी हुई हैं। यह संकेत देता है कि बच्चों की सेहत को लेकर अभी भी सतर्कता और सुधार की जरूरत है।
अस्पताल के खर्च में भारी बढ़ोतरी
सर्वे का एक और चिंताजनक पहलू सामने आया है जो बताता है कि अस्पताल में भर्ती होने पर जेब से होने वाला खर्च लगभग 70% तक बढ़ गया है। यह सीधे तौर पर आम लोगों के आर्थिक बोझ को दर्शाता है। खासकर मेडिकल सुविधाओं का यह खर्च मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए आर्थिक समस्या पैदा कर देता है।
