ग्लूटेन इनटॉलेरेंस एक पाचन संबंधी विकार है, जिसके कारण व्यक्ति को ग्लूटेन वाले खाने से नुकसान होता है।
डाइटीशियन बताते हैं कि ज़्यादातर लोग जिन्हें ग्लूटेन सेंसिटिविटी होती है, उन्हें दस्त, पेट फूलना और गैस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस लेख में, हम जानेंगे कि ग्लूटेन इनटॉलेरेंस को कैसे मैनेज किया जाए।
ग्लूटेन इनटॉleरेंस को मैनेज करने के लिए ज़रूरी टिप्स
🔸गेहूँ, राई और जौ वाले सभी प्रोडक्ट्स से बचें।
बेक किए हुए खाने से बचें।
🔸सभी सीज़निंग, थिकनर और मैरिनेड में ग्लूटेन वाले एडिटिव्स की जाँच करें।
🔸प्रोसेस्ड खाने और मीट से बचें।
🔸ज़्यादा साबुत अनाज खाएँ – चावल, सफ़ेद चावल, बाजरा, कुट्टू, बीन्स, बीज और नट्स।
🔸अपनी रोज़ाना की डाइट में फल और सब्ज़ियों की मात्रा बढ़ाएँ।
🔸ताज़ा मीट, मछली, पोल्ट्री, अंडे और डेयरी प्रोडक्ट्स चुनें।
निष्कर्ष
ग्लूटेन-फ्री डाइट अपनाना शुरू में मुश्किल लग सकता है, क्योंकि इसमें उन चीज़ों की एक लंबी लिस्ट होती है जिनसे बचना होता है। जब आप अपनी डाइट में कुछ बदलाव करेंगे, तो आपको दोबारा ग्लूटेन इनटॉलेरेंस की समस्या नहीं होगी।
