आज की भागदौड़ भरी आधुनिक लाइफस्टाइल और नाइट शिफ्ट कल्चर के कारण हममें से ज्यादातर लोगों के खाने-पीने का समय पूरी तरह बदल चुका है। रात को देर से घर लौटना और फिर आराम से टीवी या मोबाइल देखते हुए लेट नाइट डिनर करना या सोने से पहले चिप्स, कुकीज और चॉकलेट जैसी चीजें खाना आज हर दूसरे व्यक्ति की आदत बन चुकी है।

लेकिन अगर आप भी इस रूटीन को फॉलो कर रहे हैं, तो संभल जाइए! हाल ही में आई एक बेहद चौंकाने वाली मेडिकल स्टडी ने पूरी दुनिया को अलर्ट कर दिया है। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि अच्छी सेहत के लिए सिर्फ यह जरूरी नहीं है कि ‘हम क्या खा रहे हैं’, बल्कि इससे कई गुना ज्यादा यह मायने रखता है कि ‘हम किस समय खा रहे हैं’। लाइफस्टाइल एडिटर श्वेता चौहान की इस विशेष हेल्थ रिपोर्ट में जानिए कि कैसे आपकी यह आदत आपके पूरे शरीर को अंदर से बीमार कर रही है।

 

क्या है यह ‘क्रोनोन्यूट्रीशन’ ? 

 

 

इन दिनों दुनिया भर के बड़े हेल्थ एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिक ‘क्रोनोन्यूट्रीशन’ (Chrononutrition) नाम के एक नए विषय पर सबसे ज्यादा रिसर्च कर रहे हैं। आम तौर पर हम न्यूट्रिशन यानी पोषण के बारे में तो जानते हैं, लेकिन क्रोनोन्यूट्रीशन विज्ञान की वह आधुनिक शाखा है जो यह गहराई से स्टडी करती है कि हमारे खाने के सटीक समय का हमारे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी (Body Clock), पाचन तंत्र और हमारी आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया (Gut Bacteria) पर क्या और कितना गहरा असर पड़ता है। इस नवीनतम रिसर्च में यह बेहद डराने वाला सच सामने आया है कि जो लोग लगातार देर रात को खाना खाते हैं या बहुत ज्यादा मानसिक तनाव (Stress) के समय भोजन करते हैं, उनके आंतों के बैक्टीरिया पूरी तरह असंतुलित हो जाते हैं, जिससे उन्हें पेट की गंभीर बीमारियां घेर लेती हैं।

 

11,000 लोगों पर हुआ महा-रिसर्च, रात 9 बजे के बाद खाने वालों में ढाई गुना बढ़ा बीमारियों का खतरा

 

साल 2026 की प्रतिष्ठित ‘डाइजेस्टिव डिसीज वीक कॉन्फ्रेंस’ (Digestive Disease Week Conference) में शोधकर्ताओं ने एक बहुत बड़ा डेटा दुनिया के सामने रखा है। यह स्टडी करीब 11,000 से अधिक लोगों पर लंबे समय तक की गई। रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, जिन लोगों ने रात में 9 बजे के बाद अपने पूरे दिनभर की कुल कैलोरी का एक-चौथाई (25%) से ज्यादा हिस्सा भोजन के रूप में लिया, उनमें पेट से जुड़ी दर्दनाक समस्याएं जैसे भयंकर कब्ज (Constipation) और दस्त (Diarrhea) की शिकायत सबसे ज्यादा पाई गई। इसके विपरीत, जिन समझदार लोगों ने रात 9 बजे से पहले ही अपना डिनर पूरी तरह खत्म कर लिया था, उनमें पेट से जुड़ी इन सभी गंभीर परेशानियों का खतरा 2.5 गुना तक कम देखा गया। स्टडी यह भी साफ करती है कि जब आप गुस्से या तनाव में होते हैं और उस वक्त कुछ खाते हैं, तब भी शरीर पर ऐसा ही बुरा असर पड़ता है।

 

बॉडी क्लॉक और सर्केडियन रिदम का चक्र

 

दरअसल, हमारे शरीर के भीतर कुदरत की दी हुई एक अनमोल जैविक घड़ी काम करती है, जिसे मेडिकल की भाषा में ‘सर्केडियन रिदम’ (Circadian Rhythm) कहा जाता है। यह आंतरिक घड़ी हमारे शरीर के हर महत्वपूर्ण फंक्शन का एक समय तय करती है, जिसमें हमारा मेटाबॉलिज्म, गहरी नींद, हॉर्मोन्स का निकलना और भोजन का पाचन शामिल है। यहां तक कि हमारी आंतों (Gut) के भीतर मौजूद करोड़ों माइक्रोस्कोपिक बैक्टीरिया भी इसी रिदम के हिसाब से एक्टिव होते हैं। जब हम रात को सूरज ढलने के बहुत बाद या बेवक्त खाना शरीर में डालते हैं, तो यह पूरी बॉडी क्लॉक बुरी तरह क्रैश हो जाती है। रात के समय हमारा पाचन तंत्र सोने की तैयारी में होता है और उस वक्त भारी भोजन मिलने से वह उसे ठीक से पचा नहीं पाता, जिससे खाना आंतों में सड़ने लगता है।

 

इन डेंजर सिग्नल्स को बिल्कुल न करें इग्नोर, ऐसे पहचानें कि देर से खाना आपके शरीर को कब खोखला कर रहा है

 

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि महीने में एक या दो बार किसी पार्टी या मजबूरी में रात को देर से खाना खाना कोई बड़ी समस्या नहीं है, हमारा शरीर इसे मैनेज कर लेता है। असली डेंजर ज़ोन तब शुरू होता है जब आप इसे अपनी रोज की आदत या लाइफस्टाइल बना लेते हैं। आप कैसे पहचानेंगे कि देर से खाने की आदत आपके शरीर को भीतर से नुकसान पहुंचा रही है? इसके लिए शरीर कुछ साफ संकेत देता है। अगर आपको सुबह उठते ही पेट साफ न होने यानी कब्ज की समस्या रहती है, बार-बार दस्त या लूज मोशन होते हैं, छाती में जलन और खट्टी डकारें (Acid Reflux) आती हैं, या सुबह उठने पर भारीपन और थकान महसूस होती है, तो समझ जाइए कि आपकी आंतें खतरे में हैं और आपको तुरंत अपना डिनर टाइम बदलने की जरूरत है।

By AMRITA

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