
हाल के वर्षों में एक नई हेल्थ प्रैक्टिस चर्चा में आई है, जिसे ‘साइलेंट वॉकिंग’ कहा जाता है। खासकर जेन-जी (Gen Z) के बीच यह ट्रेंड काफी चर्चा में है।
साइलेंट वॉकिंग का मतलब है बिना किसी डिजिटल डिसरप्शन, संगीत, ऑडियो या बातचीत के पैदल चलना। इस दौरान व्यक्ति अपना पूरा ध्यान अपने आसपास के वातावरण, सांसों, शरीर की गतिविधियों और प्रेजेंट मोमेंट पर केंद्रित करता है। एक्सपर्ट इसे माइंडफुलनेस और वॉकिंग मेडिटेशन का एक सरल रूप मानते हैं।
रिसर्च के परिणाम
हालांकि साइलेंट वॉकिंग पर सीधे तौर पर बहुत अधिक शोध उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन माइंडफुल वॉकिंग और वॉकिंग मेडिटेशन पर किए गए कई अध्ययनों से इसके संभावित लाभों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
चिंता और तनाव को कम करने में मदद
वॉकिंग और मेडिटेशन के कम्बाइंड इफेक्ट्स पर किए गए शोध बताते हैं कि दोनों गतिविधियों का कॉम्बिनेशन मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित रूप से मेडिटेशन और वॉकिंग करने वाले लोगों में तनाव और चिंता के लक्षणों में कमी देखी गई।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब व्यक्ति बिना किसी डिसरप्शन के चलता है, तो उसका ध्यान वर्तमान क्षण पर केंद्रित होता है। इससे दिमाग को लगातार मिलने वाले बाहरी उत्तेजनों से राहत मिलती है और मानसिक शांति महसूस हो सकती है।
ब्लड शुगर कंट्रोल
साल 2016 में ‘कॉम्प्लिमेंट्री थेरेपीज इन मेडिसिन’ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों पर वॉकिंग मेडिटेशन के प्रभावों का अध्ययन किया गया। यह शोध थाईलैंड के महिदोल यूनिवर्सिटी से जुड़े रिसर्चर्स द्वारा किया गया था।
अध्ययन में पाया गया कि 12 सप्ताह तक वॉकिंग मेडिटेशन करने वाले प्रतिभागियों में रक्त शर्करा ब्लड शुगर, ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन और ब्लड प्रेशर के स्तर में सुधार देखा गया। रिसर्चर्स ने निष्कर्ष निकाला कि माइंडफुलनेस के साथ की गई वॉक सामान्य पैदल चलने की तुलना में अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकती है।
मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण
मेडिटेशन और ब्रेन हेल्थ पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन डॉ. ग्लेन एल. जियोंग और डॉ. पी. मुरली दोराइस्वामी द्वारा किया गया था। ये रिसर्चर्स यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, डेविस और ड्यूक यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर से जुड़े रहे हैं।
उनके अध्ययन में पाया गया कि नियमित मेडिटेशन मस्तिष्क की प्लास्टिसिटी को बढ़ावा दे सकता है, संज्ञानात्मक क्षमता (कॉग्निटिव फंक्शन) में सुधार कर सकता है और उम्र के साथ होने वाली मानसिक गिरावट के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
चूंकि साइलेंट वॉकिंग में भी माइंडफुलनेस का तत्व शामिल होता है, इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके जरिए भी मस्तिष्क स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। हालांकि इस संबंध में और अधिक शोध की आवश्यकता है।
याददाश्त को बेहतर बना सकती है वॉकिंग
जर्मनी के शोधकर्ता मार्टिन डेनकिंगर और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित शारीरिक गतिविधि, विशेष रूप से पैदल चलना, उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क की सोचने-समझने और कार्य करने की क्षमता में आने वाली कमी में सुधार कर सकता है। रिसर्चर्स के अनुसार, वॉकिंग मस्तिष्क में ब्लड फ्लो को बेहतर बनाती है, जिससे याददाश्त, ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
साइलेंट वॉकिंग के अन्य संभावित फायदे
साइलेंट वॉकिंग स्ट्रेस कम करने, मूड बेहतर बनाने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकती है। यह नींद की गुणवत्ता, एनर्जी लेवल और हार्ट हेल्थ को भी सपोर्ट करती है। साथ ही, यह व्यक्ति को प्रकृति और स्वयं से जुड़ने का अवसर प्रदान करती है, जिससे मानसिक शांति और आत्म-जागरूकता बढ़ सकती है।
क्या साइलेंट वॉकिंग सभी के लिए सही है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को साइलेंट वॉकिंग से समान लाभ मिले। कुछ लोगों को शांति में चलना अच्छा लग सकता है, जबकि कुछ लोगों को संगीत सुनना या किसी मित्र के साथ बातचीत करना अधिक सुकून दे सकता है।
यदि वॉक के दौरान व्यक्ति बार-बार नकारात्मक विचारों में उलझ जाता है या तनावपूर्ण बातों पर ही ध्यान केंद्रित करता है, तो उसके लिए साइलेंट वॉकिंग उतनी प्रभावी नहीं हो सकती। ऐसे में गाइडेड मेडिटेशन या सकारात्मक ऑडियो कंटेंट बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।
