डायबिटीज केवल ब्लड शुगर ही नहीं बढ़ाती बल्कि यह शरीर के कई हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है। इन्हीं में से एक समस्या है ‘फ्रोजन शोल्डर’, जिसे कई लोग सामान्य कंधे का दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों में इस समस्या का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में काफी अधिक देखा जाता है।

 

हाल ही में विभिन्न मेडिकल रिसर्च में यह सामने आया है कि डायबिटीज के मरीजों में कंधे से जुड़ी परेशानियां अधिक देखने को मिलती हैं। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से कंधे में दर्द, जकड़न या हाथ उठाने में दिक्कत महसूस हो रही है, तो समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

 

क्या होता है फ्रोजन शोल्डर ?

फ्रोजन शोल्डर एक ऐसी स्थिति है जिसमें कंधे के जोड़ के आसपास मौजूद टिश्यू धीरे-धीरे सख्त होने लगते हैं। इसकी वजह से कंधे की मूवमेंट सीमित हो जाती है और हाथ को ऊपर उठाना, पीछे ले जाना या सामान्य गतिविधियां करना मुश्किल हो सकता है। शुरुआत में हल्का दर्द लगता है, लेकिन समय के साथ कंधे में जकड़न बढ़ने लगती है। कई मामलों में मरीज को कपड़े पहनने, बाल संवारने या सामान उठाने जैसे रोजमर्रा के कामों में भी परेशानी होने लगती है।

 

डायबिटीज में क्यों बढ़ जाता है खतरा?

 

विशेषज्ञों के अनुसार जब लंबे समय तक ब्लड शुगर का लेवल कंट्रोल में नहीं रहता, तो इसका असर शरीर के टिश्यू और जोड़ों पर पड़ने लगता है। ज्यादा ग्लूकोज शरीर में मौजूद कोलेजन प्रोटीन को प्रभावित कर सकता है, जिससे टिश्यू की लचक कम हो जाती है। इसके अलावा लगातार बनी रहने वाली सूजन शरीर के कई हिस्सों तक रक्त प्रवाह नहीं पहुंच पाती। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों में फ्रोजन शोल्डर की संभावना अधिक रहती है।

 

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

 

कंधे में लगातार दर्द रहना -हाथ ऊपर उठाने में कठिनाई -कंधे में जकड़न महसूस होना -सोते समय दर्द बढ़ जाना -हाथ को पीछे ले जाने में परेशानी -डेली रूटीन के दौरान मूवमेंट न होना

 

तीन चरणों में बढ़ती है समस्या

1. फ्रीजिंग स्टेज:इस शुरुआती चरण में दर्द धीरे-धीरे बढ़ने लगता है और कंधे की गतिविधियां कम होने लगती हैं।

2.  फ्रोजन स्टेज : इस दौरान दर्द कुछ कम हो सकता है, लेकिन कंधे की जकड़न बनी रहती है। मरीज के लिए हाथ घुमाना या उठाना काफी मुश्किल हो जाता है।

 

3. थोविंग स्टेज: यह रिकवरी का चरण होता है, जिसमें धीरे-धीरे कंधे की मूवमेंट वापस आने लगती है। हालांकि पूरी तरह ठीक होने में कई महीने से लेकर दो साल तक का समय लग सकता है।

 

बचाव के लिए क्या करें?

 

ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें : नियमित व्यायाम करें -कंधे की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें -लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठें -कंधे में लगातार दर्द होने पर डॉक्टर से संपर्क करें

 

डायबिटीज के मरीजों को कंधे में होने वाले दर्द और जकड़न को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर पहचान और सही इलाज से फ्रोजन शोल्डर की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और सामान्य जीवनशैली बनाए रखना आसान हो सकता है।

By AMRITA

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