
महिलाओं में मौत के सबसे बड़ी वजहों में से एक है, “हार्ट हेल्थ रिस्क “। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं में दिल की बीमारी के कारण और जोखिम को लेकर जानकारी बहुत कम है।
उनमें हार्ट डिजीज की पहचान अक्सर देर से होती है, क्योंकि महिलाओं में इसके लक्षण और रिस्क फैक्टर पुरुषों से काफी अलग होते हैं। इसलिए हर महिला को उनके हार्ट हेल्थ से जुड़ी ये 5 चीजें जानना बेहद जरूरी है।
♣ अलग-अलग होते हैं महिलाओं में दिल की बीमारी के लक्षण
♦ महिलाओं में रिस्क फैक्टर पुरुषों से अलग होते हैं
हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और दिल की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री पुरुषों और महिलाओं दोनों में हार्ट डिजीज का खरता बढ़ाती है। लेकिन महिलाओं में PCOS, ल्यूपस और रूमेटाइड आर्थराइटिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियां भी दिल और नसों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली प्री-एक्लेमप्सिया और जेस्टेशनल डायबिटीज, आगे चलकर महिलाओं में दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ा सकती है।
♦ मेनोपॉज दिल के लिए हो सकता है बड़ा बदलाव
एस्ट्रोजन हार्मोन दिल और नसों को सुरक्षा देता है। इसलिए महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले दिल की बीमारी लगभग 10 साल बाद होती है। मेनोपॉज के बाद जब यह कम होता है तो, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है और नसें सख्त हो सकती है। इसलिए इस उम्र में हार्ट चेकअप महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है।
♦ सिर्फ सीने में दर्द ही हार्ट अटैक के लक्षण नहीं
महिलाओं में हार्ट अटैक हमेशा तेज सीने के दर्द से नहीं आता। सीडर-सिनाई में कार्डियोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ नैटली बेलो के अनुसार महिलाओं पुरुषों की तुलना में कई लक्षण होने की संभावना ज्यादा होती है, जैसे सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, जबड़े में दर्द, पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, पसीना और थकान जैसी दिक्कत।
♦ आर्टरी ब्लॉकेज के साथ हो सकते हैं और भी कारण
पुरुषों में हार्ट अटैक आमतौर पर बड़ी नस में ब्लॉकेज से हो सकता है। वहीं महिलाओं में यह कई बार छोटी नसों की बीमारी-माइक्रो वैस्कुलर डिजीज, नसों में ऐंठन, डिलीवरी के बाद होने वाला स्पॉन्टेनियस आर्टरी फटा या ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम भी हार्ट अटैक की वजह बन सकते हैं।
♦ एंजियोग्राफी के अलावा हार्ट MRI, PET स्कैन भी जरूरी
नॉर्थवेल हेल्थ में विमेंस हार्ट प्रोग्राम की सिस्टम डायरेक्टर निशा पारिख बताती है कि कई बार एंजियोग्राफी में सब ठीक दिखता है, फिर भी हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। ऐसे में महिलाओं को हार्ट MRI, PET स्कैन या कोरोनरी फंक्शन टेस्टिंग की सलाह दी जाती है।
अमृता कुमारी (क्वालीफाईड डायटीशियन ,अहमदाबाद)
