रोज़ की गेहूं की रोटी जहां ज़रूरी पोषण देती है, वहीं उसमें थोड़ा-सा बेसन मिलते ही वही रोटी पोषण का पावरहाउस बन जाती है। बेसन प्रोटीन बढ़ाता है, घुलनशील फाइबर जोड़ता है, ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है और फोलेट-आयरन जैसे ज़रूरी मिनरल्स से शरीर को भर देता है। बिना किसी बड़ी डाइट चेंज के, बस समझदारी से किया गया यह छोटा बदलाव सेहत पर बड़ा असर डालता है।
गेहूं के आटे में बेसन मिलाकर रोटी खाने के फायदे
ज़्यादा प्रोटीन, लंबे समय तक एनर्जी: 100 ग्राम बेसन में करीब 22 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि गेहूं में लगभग 13 ग्राम। दोनों को मिलाने से रोटी का प्रोटीन कंटेंट बढ़ जाता है, जिससे कार्ब्स धीरे-धीरे पचते हैं और एनर्जी में अचानक गिरावट नहीं आती।
बेहतर पाचन: बेसन का घुलनशील फाइबर आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है और मल त्याग को नियमित करने में मदद करता है। आटा नरम बनता है, रोटी पचाने में आसान रहती है और कुछ ही हफ्तों में पाचन ज़्यादा संतुलित महसूस होता है।
ब्लड शुगर पर कंट्रोल: बेसन के कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और रेसिस्टेंट स्टार्च ग्लूकोज को धीरे रिलीज़ करते हैं। इसलिए गेहूं-बेसन की रोटी ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम रखती है. डायबिटीज या प्रीडायबिटीज वालों के लिए बेहतर विकल्प।
फोलेट, आयरन और मैग्नीशियम का फायदा: बेसन मिलाने से फोलेट, आयरन और मैग्नीशियम की मात्रा बढ़ती है। ये पोषक तत्व मांसपेशियों के काम, एनर्जी मेटाबॉलिज्म और खून की सेहत को सपोर्ट करते हैं।
एंटीऑक्सीडेंट सपोर्ट: बेसन में मौजूद पॉलीफेनॉल्स फ्री-रेडिकल्स से कोशिकाओं की रक्षा करते हैं और हानिकारक कंपाउंड्स को कुछ हद तक कम करने में मदद करते हैं।
कैसे मिलाएं बेसन
1कप गेहूं में आधा कप बेसन मिलाएं। स्वाद और पाचन के अनुसार धीरे-धीरे 40-60% तक बढ़ा सकते हैं। पानी थोड़ा-थोड़ा डालें, क्योंकि बेसन पानी ज़्यादा सोखता है। मिलाए गए आटे को बहुत लंबे समय तक स्टोर न करें, इससे खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।
