एक समय था जब छोटे बच्चों को पालना बहुत ही ज्यादा मुश्किल काम हुआ करता था।कोमल नवजात शिशु का पालन – पोषण हर माँ के लिए बहुत ही कष्टकारी हुआ करता था। रात-रात भर बच्चों को लेकर करवटें बदलते रहना उन्हें गोद में लेकर झुलाना ताकि वो आराम से सो पाए क्योंकि, उनकी नींद पूरी नहीं होती थी बार-बार सुसु करना दूध पीने के लिए उठना, हर माँ ने इन परेशानियों को झेला है। लेकिन, आज के युग में डायपर ने हर मां को थोड़ी राहत जरूर दी है। जी हां, यह डायपर वाकई में बड़ी कमाल की चीज है जिसने बच्चों की नींद भी पूरी की और मां को भी थोड़ा आराम दिया। लेकिन इसी कमाल के डायपर से कई तरीके की परेशानी भी होती है अगर सही तरीके से उसका इस्तेमाल न किया जाए।

 

बच्चों के लिए डायपर सुरक्षित है, लेकिन उसे लगातार 24 घंटे नहीं पहनाना चाहिए। डायपर को समय-समय पर बदलना और बच्चे को “डायपर-फ्री टाइम” देना ज़रूरी है, ताकि त्वचा साफ़ और सूखी रहे। लगातार डायपर पहनने से रैशेज़, त्वचा में जलन, संक्रमण और मूत्र मार्ग में संक्रमण (UTI) हो सकता है, इसलिए नियमित रूप से डायपर बदलना और हवा में खुली हवा लगाना ज़रूरी है।

 

सुरक्षित उपयोग 

 

नियमित रूप से बदलें: डायपर को हर 2-3 घंटे में और जैसे ही वह गीला या गंदा हो जाए, बदल दें।

“डायपर-फ्री टाइम” दें: बच्चे को दिन में कई बार कुछ देर के लिए बिना डायपर के खुला छोड़ें ताकि त्वचा को हवा लग सके।

त्वचा की देखभाल करें: हर बार डायपर बदलने के बाद बच्चे की त्वचा को साफ़ करें और ज़रूरी हो तो पेट्रोलियम जेली जैसी क्रीम लगाएँ।

सही डायपर चुनें: ऐसे डायपर चुनें जो हवादार हों और त्वचा के अनुकूल हों।

 

असुरक्षित उपयोग के कारण

 

त्वचा में जलन और रैशेज़: लगातार गीला और गंदा डायपर पहनने से रैशेज़ और लाल दाने हो सकते हैं।

संक्रमण: गीलापन बैक्टीरिया और फंगस को पनपने देता है, जिससे त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

मूत्र मार्ग में संक्रमण (UTI): लंबे समय तक गीला डायपर पहनने से संक्रमण पेशाब के रास्ते तक पहुँच सकता है और UTI हो सकता है।

शारीरिक विकास: लगातार डायपर पहनने से बच्चे को चलने या रेंगने में मुश्किल हो सकती है, जो उसके शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

कुछ शिशुओं की त्वचा दूसरों की तुलना में ज़्यादा संवेदनशील होती है। डिस्पोजेबल डायपर ज़्यादा तरल पदार्थ सोखते हैं और रात में या ऐसी परिस्थितियों में इस्तेमाल करना सबसे अच्छा होता है जहाँ उन्हें बार-बार बदलना सुविधाजनक न हो। दिन के अन्य समय में, आप अन्य विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। हर दो से तीन घंटे में डायपर बदलना ज़रूरी है।

बच्चों को आम तौर पर 18 से 30 महीने की उम्र के बीच डायपर पहनाना बंद कर देना चाहिए, लेकिन यह उम्र हर बच्चे के लिए अलग हो सकती है। कई बच्चे 3 साल की उम्र तक डायपर छोड़ देते हैं। बच्चों को 2 से 2.5 साल की उम्र के बीच टॉयलेट ट्रेनिंग देना शुरू करने की सलाह दी जाती है।

 

बच्चों को डायपर कब पहनाना चाहिए

जन्म से 18-24 महीने: इस अवधि के दौरान बच्चों को डायपर की आवश्यकता होती है।

18-30 महीने: यह वह उम्र है जब बच्चे टॉयलेट ट्रेनिंग के लिए तैयार हो सकते हैं और डायपर का उपयोग कम कर सकते हैं।

3 साल के बाद: ज़्यादातर बच्चों को इस उम्र तक डायपर नहीं पहनना चाहिए। हालांकि, कुछ बच्चे 4 साल की उम्र तक डायपर पहनना जारी रख सकते हैं।

 

महत्वपूर्ण बातें: 

व्यक्तिगत विकास: हर बच्चा अलग होता है, इसलिए डायपर छोड़ने की सही उम्र बच्चे के विकास पर निर्भर करती है।

संकेत: बच्चे के व्यवहार में बदलाव देखकर आप समझ सकते हैं कि वह डायपर छोड़ने के लिए तैयार है या नहीं। जब वे इशारा करते हैं कि वे गीले हैं या “पेशाब” जैसा कोई शब्द कहना सीखते हैं, तो वे टॉयलेट ट्रेनिंग के लिए तैयार होते हैं।

नुकसान: लंबे समय तक डायपर पहनाने से फंगल इंफेक्शन और मूत्र मार्ग के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, 3 साल की उम्र तक डायपर पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए, जब तक कि डॉक्टर द्वारा सलाह न दी जाए।

 

अमृता कुमारी – नेशन्स न्यूट्रिशन                                 क्वालीफाइड डायटीशियन                ‌                       डायबिटीज एजुकेटर, अहमदाबाद

By AMRITA

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