
जन्म से लेकर मृत्यु तक हम उम्र की अलग – अलग अवस्था से गुजरते हैं। उम्र की हर पड़ाव पर हमें अलग-अलग पोषक तत्व की अलग-अलग मात्रा जरूरत पड़ती है। हर उम्र के लिए अलग बैलेंस डाइट होता है और साथ ही अलग प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। बच्चों में विकास के लिए अधिक पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है युवावस्था में अलग पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है वृद्धावस्था में भी इलेक्ट्रिसिटी की पोषक तत्व की जरूरत पड़ती है ऐसे में जब प्राकृतिक स्रोतों से हमें सही आहार या पोषक तत्व नहीं मिल पाए तो हमें सप्लीमेंट्स की जरूरत पड़ती है और सप्लीमेंट्स भी हर उम्र में अलग-अलग मात्रा और अलग-अलग तरीके से दिया जाता है। आइए जानते हैं इससे मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में।
बच्चों के लिए फायदेमंद:
बच्चों में दांत निकलने की प्रक्रिया चार महीने के बाद शुरू होती है। इस दौरान, कैल्केरिया फॉस की 1-1 गोली दिन में तीन बार एक चम्मच पानी में मिलाकर दी जाती है। वहीं, बायो-21 दवा का सेवन आठ महीने से डेढ़ साल तक दो-दो गोली दिन में तीन बार चम्मच में मिलाकर किया जा सकता है। ये दवाएं कम से कम एक साल तक प्रभावी रहती हैं। कमजोर हड्डियों, अधिक पसीना आने या मिट्टी खाने की आदत होने पर कैल्केरिया कार्ब का सेवन दिन में तीन बार किया जाता है।
गर्भावस्था में उपयोग:
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में आयरन की कमी से एनीमिया की समस्या आम होती है। ऐसे में चौथे महीने से महिलाओं को फैरम फॉस का सेवन आठवें महीने तक दिन में 4-4 गोली तीन बार करने की सलाह दी जाती है।
वृद्धावस्था में सप्लीमेंट्स:
50-60 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों और महिलाओं की मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इस स्थिति में कैल्शियम फॉस का सेवन दिन में तीन बार 4-4 गोली और जोड़ों के दर्द से राहत के लिए कैल्केरिया फ्लोर का उपयोग किया जाता है।
प्राकृतिक स्रोतों से पोषण:
सप्लीमेंट्स तभी प्रभावी होते हैं जब इनके प्राकृतिक स्रोतों का नियमित सेवन किया जाए। जैसे, कैल्शियम के लिए दूध और आयरन के लिए हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन आवश्यक है। कभी-कभी, इन खाद्य पदार्थों के सेवन के बावजूद, आंतें इन पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाती हैं। होम्योपैथी सप्लीमेंट्स इनकी अवशोषण क्षमता को सुधारने में मदद कर सकते हैं।
अमृता कुमारी – नेशन्स न्यूट्रीशन क्वालीफाईड डायटीशियन डायबिटीज एजुकेटर,अहमदाबाद
