
अब तक जिसे कुदरत के नियमों के खिलाफ और पूरी तरह नामुमकिन मान लिया जाता था, उसे अमेरिका की टेक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने सच कर दिखाया है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कमाल किया है, जो आने वाले समय में इंसानों को अपने खोए हुए अंग वापस पाने की ताकत दे सकता है.
वैज्ञानिकों ने बिना किसी स्टेम सेल या जेनेटिक इंजीनियरिंग से, सिर्फ दो नेचुरल प्रोटन की सहायता से चूहों की कटी हुई उंगलियों को फिर से उगाने में कामयाबी हासिल की है.
कैसे हुआ यह चमत्कार?
आमतौर पर इंसानों या चूहों जैसे स्तनधारी जीवों में जब भी कोई अंग कटता है, तो वहां घाव भरने के बाद स्कार टिश्यू यानी निशान बन जाता है, लेकिन अंग दोबारा नहीं उगता. वैज्ञानिकों ने चूहों की कटी हुई उंगलियों पर दो खास प्रोटीन्स का समय-समय पर लगाया-
फाइब्रोब्लास्ट ग्रोथ फैक्टर 2 (FGF2)
घाव बंद होने के बाद सबसे पहले इसे चूहे पर लगाया गया. इसने कटे हुए हिस्से पर ब्लास्टेमा का निर्माण किया. ब्लास्टेमा कोशिकाओं का वो समूह होता है जो नए अंग को उगाने की शुरुआत करता है.
बोन मॉर्फोजेनेटिक प्रोटीन 2 (BMP2)
कुछ दिनों बाद इस दूसरे प्रोटीन का छिड़काव किया गया. इसने कोशिकाओं को निर्देश दिया कि वे सिर्फ निशान न बनाएं, बल्कि नए अंग का निर्माण भी शुरू करें.
निशान की जगह बन गई असली हड्डी और जोड़
इस सटीक ट्रीटमेंट का असर हैरान करने वाला था. चूहों की कटी हुई जगह पर न सिर्फ नई हड्डियां और कार्टिलेज उगे, बल्कि टेंडन, लिगामेंट्स और काम करने वाले जोड़ भी फिर से बन गए. अंगों के विकास के लिए जरूरी ग्रोथ प्लेट भी वहां देखी गई, जिसका मतलब है कि शरीर ने पुराने अंग की मरम्मत नहीं की, बल्कि नए सिरे से उसे पूरा उगाया.
शरीर के अंदर ही है शक्ति
इस रिसर्च के लीडर डॉ. केन मुनेओका के मुताबिक हमारे शरीर में घाव भरने वाली कोशिकाएं दो रास्ते चुन सकती हैं, या तो वे घाव पर निशान बना दें या फिर नया अंग उगाना शुरू कर दें. वैज्ञानिकों ने बस उनके रास्ते में बदलाव किया.
रिसर्चर्स डॉ. लैरी सुवा के मुताबिक जिन कोशिकाओं को हम अब तक दोबारा प्रोग्राम करने के लायक नहीं समझते थे, वे वास्तव में बहुत ही मददगार निकलीं. इंसानों या स्तनधारियों में अंग दोबारा उगाने की क्षमता खत्म नहीं हुई है, बस वो शरीर के अंदर सोई हुई है.
मेडिकल दुनिया पर क्या होगा असर?
हालांकि यह रिसर्च अभी चूहों पर हुआ है, लेकिन इसने भविष्य के लिए एक बड़ा रास्ता खोल दिया है. राहत की बात यह है कि इस रिसर्च में इस्तेमाल दोनों प्रोटीन्स FGF2 और BMP2 से मेडिकल जगत पहले से वाकिफ है और इनके सेफ्टी टेस्ट भी हो चुके हैं.
आने वाले समय में इस तकनी से होगी सहूलियत
एक्सीडेंट या सर्जरी में कटे अंगों को वापस उगाया जा सकेगा.
गंभीर रूप से डैमेज हुई हड्डियों, जोड़ों और लिगामेंट्स को ठीक किया जा सकेगा.
ऑपरेशन या गहरी चोट के बाद शरीर पर बनने वाले भद्दे निशानों को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकेगा.
अब तक वैज्ञानिक कटे अंगों के लिए बाहरी स्टेम सेल या प्लास्टिक और मेटल के अंगों पर निर्भर थे, लेकिन इस खोज ने साबित कर दिया है कि हमारे शरीर के पास खुद को पूरी तरह ठीक करने की ताकत मौजूद है.
