देशभर में भीषण गर्मी ने सभी का जीना मुश्किल कर दिया है. गर्मी से बचने के लिए हम सभी कूलर, एसी, पंखा का सहारा लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बदलते मौसम की यह मार सबसे ज्यादा हमारे घर के मासूम बच्चों पर पड़ रही है?

जी हां आपने बिल्कुल सही पढ़ा, क्योंकि ये हम नहीं बल्कि, UNICEF की ‘चिल्ड्रन्स क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026’ में खुलासा हुआ है, जो हर माता-पिता को चिंता में डाल सकता है.

 

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के बच्चे दुनिया में सबसे ज्यादा भीषण गर्मी और सूखे के खतरे का सामना कर रहे हैं.

 

UNICEF की ताजी रिपोर्ट, बढ़ते खतरे की ओर इशारा

 

​UNICEF ने दुनिया भर के बच्चों पर मौसम के खराब बदलावों (क्लाइमेट चेंज) के असर को मापने के लिए एक स्टडी की है. इसमें बाढ़, तूफान, सूखा और भीषण गर्मी जैसे 8 बड़े खतरों को शामिल किया गया था. ​रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में जितने भी बच्चे हैं, उनमें से लगभग 46% (यानी 1.1 अरब बच्चे) कम से कम तीन बड़े मौसम संबंधी खतरों को झेल रहे हैं. वहीं अगर सिर्फ भारत की बात करें, तो स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक है. भारत के करीब 55% बच्चे मौसम के इन 8 खतरों में से कम से कम तीन खतरों का सीधे तौर पर सामना कर रहे हैं.

 

 

गर्मी के मामले में भारत दुनिया में नंबर-1 पर-

 

​इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भीषण गर्मी के मामले में भारत को 10 में से 10 स्कोर मिला है. इसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया भर में भारत के बच्चे भीषण और जानलेवा गर्मी के सबसे बड़े शिकार हैं. गर्मी के अलावा, भारत के बच्चे सूखे की मार भी झेल रहे हैं. कृषि और मौसम से जुड़े सूखे के मामले में भारत का स्कोर 8.84 रहा है, जो कि बहुत ज्यादा है. हालांकि नाइजीरिया, बांग्लादेश और कैमरून जैसे देशों में सूखे का असर भारत से कुछ मामलों में ज्यादा है, लेकिन भारत की स्थिति भी बहुत नाजुक बनी हुई है.

 

दुनिया में भारत का स्थान –

मौसम के कई खतरों को एक साथ झेलने के मामले में (Multi-Hazard Exposure Score) भारत पूरी दुनिया में पांचवें (5th) स्थान पर है. भारत से आगे सिर्फ म्यांमार, पाकिस्तान, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देश हैं.

 

किन बीमारियों का है खतरा-

 

​UNICEF की रिपोर्ट में सिर्फ गर्मी या सूखे की ही बात नहीं की गई है, बल्कि यह भी बताया गया है कि इस बदलते मौसम के कारण बच्चों में बीमारियां कितनी तेजी से फैल रही हैं.

 

मलेरिया- मौसम बदलने और बाढ़ जैसी स्थितियों के कारण मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां बहुत तेजी से बढ़ रही हैं, जो बच्चों को आसानी से अपनी चपेट में ले लेती हैं.

जहरीली हवा- गाड़ियों और अन्य चीजों से निकलने वाला धुआं न सिर्फ गर्मी बढ़ा रहा है, बल्कि हवा को भी जहरीला बना रहा है. बच्चों के फेफड़े बहुत नाजुक होते हैं, इसलिए यह प्रदूषित हवा उनके फेफड़ों और दिमाग के विकास को भारी नुकसान पहुंचा रही है.

 

बच्चों के लिए क्यों ज्यादा खतरनाक-

 

कमजोरी- ज्यादा गर्मी के कारण बच्चों के शरीर में पानी की कमी (Dehydration) बहुत जल्दी हो जाती है.

 

इम्यूनिटी- बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों जितनी मजबूत नहीं होती, इसलिए वे हवा प्रदूषण और मलेरिया जैसी बीमारियों का शिकार जल्दी बनते हैं.

 

पढ़ाई- जब मौसम बहुत ज्यादा खराब या गर्म होता है, तो स्कूल बंद करने पड़ते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई और उनके मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है.

 

क्या है इसका समाधान?

 

​UNICEF की यह रिपोर्ट हम सभी के लिए एक वेक-अप कॉल का इशारा है. माता-पिता के तौर पर हमें बच्चों को भीषण गर्मी में सुरक्षित रखने, उन्हें हाइड्रेटेड रखने और साफ-सफाई का ध्यान रखने की सख्त जरूरत है.

By AMRITA

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