लाइफस्टाइल की छोटी-छोटी आदतों के कारण व्यक्ति को डिमेंशिया की बीमारी का खतरा हो सकता है, खासकर अकेलेपन के कारण। डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों की लोग ठीक से पहचान नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण इस बीमारी का पता व्यक्ति को तब चलता है, जब यह आपके रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगती है।

अकेले रहने के कारण लोगों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इसके कारण लोगों को स्ट्रेस, एंग्जायटी, डिप्रेशन और याददाश्त में कमी होने जैसी कई मानिसक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन क्या वाकई में इसके कारण डिमेंशिया जैसी बीमारी का खतरा बढ़ता है?

 

क्या अकेलापन के कारण डिमेंशिया का खतरा हो सकता है?

 

भले ही एक आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी हो, लेकिन हमारी रोज की लाइफस्टाइल भी इसके लक्षणों को बढ़ावा दे सकती है। लाइफ की छोटी-छोटी आदतें स्वास्थ्य को कई तरह से प्रभावित कर सकती हैं। अकेलापन उन्हीं में से एक है। डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानना अक्सर मुश्किल हो सकता है और लोग इन्हें समझ नहीं पाते हैं, खासकर जो लोग अकेले रहते हैं या दूसरे से कटे-कटे रहते हैं, उनमें यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। ऐसे लोगों में इस बीमारी का पता तब तक नहीं चल पाता है, जब तक कि यह इतनी गंभीर न हो जाए और इसके कारण रोज को काम प्रभावित होने लगे।”

 

नेहा सिन्हा के अनुसार, “कई स्टडीज में पता चलता है कि लंबे समय तक रहने वाला अकेलापन डिमेंशिया के खतरे को लगभग 30% से 60% तक बढ़ा देता है और यह रिजल्ट तब भी नहीं बदलता, जब व्यक्ति का बाकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य ठीक हो।”

 

2025 में में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, अकेलापन महसूस करने से डिमेंशिया का खतरा 31% तक बढ़ जाता है।

 

अकेलापन मानसिक स्वास्थ्य को करता है प्रभावित

 

अकेलेपन का असर सिर्फ मन पर नहीं, बल्कि पूरे शरीर पर पड़ता है। इसकी वजह से शरीर में वाले कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है और नींद प्रभावित होने लगती है। ये सब मिलकर किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकते हैं। ये परेशानियां कभी नजर नहीं आती हैं और ये धीरे-धीरे व्यक्ति की याद रखने की क्षमता को कम करने लगती है।”

By AMRITA

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