भारतीय खाद्य संग्रह में न जाने कितने अनगिनत खाद्य पदार्थ हैं जिनका उपयोग न सिर्फ खाने के रूप में होता है बल्कि औषधि और आयुर्वेद में भी इनका महत्व अतुलनीय है। इनमें से ही एक है मरुआ और मरुआ के बीज।

 

मरुआ (Sweet Marjoram) के बीज तुलसी के बीजों के समान छोटे, काले-भूरे रंग के और अत्यंत औषधीय होते हैं। ये पेट की समस्याओं, लिकोरिया, प्रमेह (धातु रोग), शरीर की कमजोरी और तनाव दूर करने में बहुत कारगर माने जाते हैं। भीगने पर ये बीज ईसबगोल की तरह फूल जाते हैं।

 

मरुआ के बीजों के मुख्य स्वास्थ्य लाभ और उपयोग:

पेट के लिए: मरुए के बीज पेट फूलना, अपच, गैस और कब्ज में राहत देते हैं।

प्रमेह और लिकोरिया: एक चम्मच बीजों को रात में पानी में भिगोकर, सुबह मिश्री या शहद के साथ लेने से प्रमेह, लिकोरिया और गर्मी दूर होती है।

ताकत के लिए: यह कमजोरी दूर करने में सहायक है और इसे पीसकर मिश्री के साथ दूध में मिलाकर पिया जा सकता है।

पवित्रता और स्वास्थ्य: यह एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर है और घर के आसपास लगाने से वातावरण शुद्ध होता है, जो बैक्टीरियल संक्रमण को कम कर सकता है।

 

इस्तेमाल करने का तरीका

पानी के साथ: एक चम्मच बीजों को रात भर भिगोएं और सुबह खाली पेट सेवन करें।

चटनी: पत्तियों का उपयोग चटनी में किया जा सकता है।

दूध के साथ: बीजों को पीसकर मिश्री और दूध के साथ सेवन करें

 

मरुआ के बीज के फायदे

 

मरुआ के बीज (Sweet Marjoram) प्रमेह, लिकोरिया, और कमजोरी जैसी समस्याओं में बेहद फायदेमंद हैं। ये बीज पित्त शामक, वात-कफ नाशक और पौष्टिक होते हैं। इन्हें रात भर भिगोकर मिश्री या शहद के साथ सुबह खाली पेट लेने से प्रमेह और गर्मी की समस्याओं में आराम मिलता है।

 

प्रमेह और लिकोरिया में लाभ: ये बीज तुलसी के बीज की तरह होते हैं, जो प्रमेह और लिकोरिया जैसी समस्याओं को दूर करने में बहुत कारगर माने जाते हैं।

कमजोरी दूर करे: कमजोर लोग अगर इसके बीजों को पीसकर मिश्री मिलाकर दूध के साथ लें, तो शारीरिक शक्ति बढ़ सकती है।

पेट से जुड़ी समस्याएं: यह कफ रोगों में भी लाभकारी है और गैस, कब्ज, अफारा और पेट के दर्द से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है।

पाचन में सुधार: मरुआ का सेवन मंदाग्नि (कमजोर पाचन) वाले लोगों के लिए पाचन और चयापचय (metabolism) को तेज कर सकता है।

पित्त शांत करे: यह पित्त को शांत करने वाला होता है, जिससे शरीर में जलन और गर्मी से राहत मिलती है।

अन्य फायदे: इसके अलावा, यह मधुमेह, किडनी से संबंधित समस्याओं और यूरिक एसिड को कम करने में भी सहायक हो सकता है।

 

सेवन विधि:

♦एक चम्मच बीजों को रात को पानी में भिगो दें।

♦सुबह भीगे हुए बीज फूलकर मोटे हो जाते हैं, इन्हें मिश्री या शहद के साथ सेवन करें।

♦अधिक लाभ के लिए इसके बीजों को पीसकर मिश्री मिलाकर दूध के साथ भी लिया जा सकता है।

 

सावधानी:

♦इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए पित्त के मरीजों को इसका सेवन बहुत सावधानी से या विशेषज्ञ की सलाह पर ही करना चाहिए।

♦गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को देने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

By AMRITA

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