
गर्भावस्था के दौरान सही खानपान के साथ-साथ हाइड्रेशन पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। शरीर में पानी की कमी से चक्कर, थकान, यूरिन संक्रमण और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो बच्चे की वृद्धि पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
यदि आप दिनभर सही समय पर हेल्दी ड्रिंक्स का सेवन करती हैं, तो इससे न केवल मां बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे को भी लाभ होता है। आज हम आपको 5 ऐसी ड्रिंक्स के बारे में बताएंगे, जिन्हें अपनी डाइट में शामिल करने से मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकते हैं।
नारियल पानी
नारियल पानी एक प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है। इसे सुबह खाली पेट या नाश्ते के बाद पीने से डिहाइड्रेशन से राहत मिलती है और उल्टी-मिचली तथा सूजन में भी आराम मिलता है।
फुल फैट दूध
दूध प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन D का एक उत्कृष्ट स्रोत है, जो बच्चे के दांतों, हड्डियों और मांसपेशियों की वृद्धि के लिए आवश्यक है। यह मां की कमजोरी को भी दूर करता है और दिनभर ऊर्जा प्रदान करता है।
छाछ
लंच के बाद छाछ का सेवन करना सबसे अधिक फायदेमंद होता है। यह पाचन को सुधारती है, गैस और एसिडिटी से राहत देती है और शरीर को ठंडक पहुंचाती है। छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट को स्वस्थ रखते हैं।
संतरे का ताजा जूस
संतरे का जूस विटामिन C से भरपूर होता है, जो इम्यूनिटी को मजबूत करता है और शरीर में आयरन के अवशोषण को बढ़ाता है। दोपहर में संतरे का जूस पीने से थकान कम होती है और तुरंत ऊर्जा मिलती है।
अनार का जूस
अनार में एंटीऑक्सीडेंट्स और आयरन होते हैं, जो हीमोग्लोबिन को बढ़ाने, कमजोरी दूर करने और बच्चे तक ऑक्सीजन की आपूर्ति को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। शाम के समय अनार का जूस पीने से दिनभर की थकान कम होती है।
जरूरीहै बतें:
♦ दिनभर में कम से कम 10 – 12 गिलास पानी पीना चाहिए।
♦ हमेशा ताजा और कम चीनी वाला जूस पीना चाहिए।
♦ ज्यादा चाय, कॉफी और पैकेज्ड ड्रिंक्स से बचना चाहिए।
♦ ज्यादा ठंडे या बर्फ वाले ड्रिंक्स से दूर रहना चाहिए।
परामर्श:
⇒ किसी नए ड्रिंक को डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। भूलकर भी मिक्स फ्रूट जूस, मॉकटेल, निंबू पानी, सोडा पानी, पपीता जूस और अनानास का जूस न पियें।
⇒ यदि आप अपने दैनिक रूटीन में इन हेल्दी ड्रिंक्स को शामिल करती हैं, तो इससे प्रेग्नेंसी अधिक सुरक्षित, आरामदायक और स्वस्थ बन सकती है। इससे मां का शरीर मजबूत रहेगा, बच्चे की वृद्धि सही होगी और इम्यूनिटी भी बेहतर रहेगी।
