♣ आयुर्वेद और योग के अनुसार, हमारे शरीर में 10 तरह की वायु (प्राण) होती हैं. ये प्राण जीवन ऊर्जा की तरह काम करती हैं और शरीर की सभी जरूरी क्रियाओं को नियंत्रित करती हैं.

इन वायु को दो भागों में बांटा गया है, जिनमें 5 मुख्य प्राण और 5 उप-प्राण शामिल हैं. ये प्राण सांस लेना-छोड़ना, पाचन, खून का संचार, बोलना, सोना-जागना, छींकना, जम्हाई लेना और पलक झपकाने जैसी क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं. इसलिए इनका संतुलन बनाए रखना अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होता है.

 

पंचप्राण शरीर की बुनियादी क्रियाओं के लिए जिम्मेदार

 

मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, शरीर के 5 मुख्य प्राण (पंचप्राण) हमारी जरूरी शारीरिक क्रियाओं को संभालते हैं.

 

प्राण: यह छाती या दिल के पास होता है. इसका काम सांस लेना-छोड़ना, दिल और फेफड़ों को सही से चलाना और शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखना है.

अपान: यह शरीर के निचले हिस्से (पेल्विक एरिया) में होता है. इसका काम मल-मूत्र त्याग और शरीर से गंदगी बाहर निकालना है.

समान: यह नाभि के आसपास होता है. इसका काम खाना पचाना, पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाना और पाचन शक्ति को संतुलित रखना है.

उदान: यह गले के पास होता है. इसका काम बोलना, निगलना, उल्टी करना और ऊर्जा को ऊपर की ओर ले जाना है.

व्यान: यह पूरे शरीर में फैला होता है. इसका काम खून का संचार करना, पलक झपकाना और शरीर की सभी गतिविधियों को चलाना है.

 

उप-प्राण शरीर की छोटी-छोटी खास क्रियाओं को करते हैं नियंत्रित

 

इसके अलावा आयुर्वेद के अनुसार, उप-प्राण शरीर की छोटी-छोटी खास क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं. ये भी 5 प्रकार के होते हैं:

 

नाग: यह पूरे शरीर में फैला होता है. इसका काम डकार आना और शरीर को गति देना है.

कूर्म: यह गले और पूरे शरीर में होता है. इसका काम पलक झपकाना और शरीर की कुछ संकुचन (सिकुड़ने वाली) क्रियाएं करना है.

कृकर (कृकल): यह गले के पास होता है, इसका काम भूख-प्यास का संकेत देना, छींकना और खांसी लाना है.

देवदत्त: यह मुंह के पास होता है, इसका काम उबासी (जम्हाई) लेना है.

धनंजय: यह पूरे शरीर में रहता है. कहा जाता है कि यह मृत्यु के बाद भी कुछ समय तक शरीर में बना रहता है और शरीर के विघटन को धीमा करता है.

 

प्राणायाम, योगासन और ध्यान से बनाए रख सकते हैं संतुलन

 

ये प्राण वायु शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. इनका संतुलन प्राणायाम, योगासन और ध्यान से किया जा सकता है, जिससे पाचन, श्वास, मानसिक शांति और समग्र स्वास्थ्य बेहतर होता है. असंतुलन से गैस, श्वास रोग, थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

By AMRITA

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