कैविटी आमतौर पर दांतों की सड़न का नतीजा होती है, जिसका इलाज न किया गया हो। आपके दांतों की सुरक्षा एक सख्त बाहरी परत करती है, जिसे ‘इनेमल’ कहते हैं। यह परत दांतों को रोज़ाना के घिसाव और बैक्टीरिया की गतिविधियों से बचाती है। जब प्लाक बैक्टीरिया आपके खाने में मौजूद चीनी (शुगर) को खाते हैं, तो वे ऐसे एसिड बनाते हैं जो धीरे-धीरे इनेमल को गला देते हैं।

जैसे-जैसे इनेमल कमज़ोर होता है, उसमें एक छोटा सा गड्ढा या छेद बनने लगता है। समय के साथ, यह खराबी बढ़ सकती है, जिससे दांतों में सेंसिटिविटी (झनझनाहट), दर्द, इन्फेक्शन और दांतों से जुड़ी दूसरी समस्याएं हो सकती हैं। कैविटी को बढ़ने से रोकने और अपने दांतों की सेहत बनाए रखने के लिए तुरंत ध्यान देना और दांतों की सही देखभाल करना बहुत ज़रूरी है।

दांतों की कैविटी का इलाज

🔸फिलिंग्स (Fillings):

दांतों की सड़न और कैविटी का सबसे आम और असरदार इलाज ‘फिलिंग’ है। यह कैविटी को और बढ़ने से रोकती है। अगर दांतों की सड़न इनेमल से आगे बढ़ गई है और आपके दांतों में छेद हो गए हैं, तो आपके डेंटिस्ट शायद आपको फिलिंग करवाने की सलाह देंगे। इस प्रक्रिया के दौरान, सड़े हुए हिस्से को हटा दिया जाता है और उसकी जगह एक ऐसा मटीरियल भर दिया जाता है जो दांत के आकार और काम को वापस ठीक कर देता है।

फिलिंग्स दांतों के रंग जैसी रेज़िन से या कई मटीरियल के मिश्रण (अमलगम) से बनाई जा सकती हैं, जिसमें पारा (mercury) भी शामिल हो सकता है। हालांकि कुछ लोग पारे को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन मेडिकल स्टडीज़ से पता चला है कि अमलगम फिलिंग्स ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित होती हैं। अगर आपको कोई चिंता है, तो अपने डेंटिस्ट से फिलिंग के दूसरे विकल्पों के बारे में बात करें।

🔸क्राउंस (Crowns):

अगर आपके दांतों की सड़न बहुत ज़्यादा है, तो आपके डेंटिस्ट नुकसान की भरपाई के लिए फिलिंग के बजाय ‘क्राउन’ लगवाने की सलाह दे सकते हैं। क्राउन फिलिंग से बड़ा होता है और सड़े हुए हिस्से को हटाने के बाद यह पूरे दांत को ऊपर से ढक लेता है। क्राउन आमतौर पर पोर्सिलेन, सोना, या पोर्सिलेन और मेटल के मिश्रण से बनाए जाते हैं।

🔸रूट कैनाल थेरेपी (Root Canal Therapy):

अगर सड़न दांत के पल्प (अंदरूनी गूदे) तक पहुंच जाती है, तो इससे इन्फेक्शन, बहुत ज़्यादा दर्द और शायद नसों को भी नुकसान पहुंच सकता है। रूट कैनाल थेरेपी में इन्फेक्टेड पल्प को हटाना, दांत को अच्छी तरह से साफ करना और उसे सील करना शामिल होता है, ताकि आगे कोई इन्फेक्शन न हो।

चाहे आपने किसी भी तरह की फिलिंग या क्राउन लगवाया हो, दांतों की पूरी देखभाल करना बहुत ज़रूरी है। इसमें दिन में दो बार ब्रश करना और दिन में एक बार फ्लॉस करना शामिल है, ताकि प्लाक हट जाए और दांतों में आगे कोई सड़न न हो। अपने दांतों में लगे फिलिंग्स या क्राउन में घिसाव या नुकसान के किसी भी संकेत के लिए नियमित रूप से उनकी जांच करते रहें।

समय के साथ, फिलिंग के किनारे खुरदरे हो सकते हैं, और उसका मटीरियल कमज़ोर पड़ सकता है या टूट सकता है, जिससे प्लाक हटाना ज़्यादा मुश्किल हो जाता है। क्राउन और फिलिंग के आस-पास की सफाई में मदद के लिए खास प्रॉडक्ट उपलब्ध हैं। आम तौर पर, इन रिस्टोरेशन को बदलने की ज़रूरत तब तक नहीं पड़ती, जब तक कि उनमें ज़्यादा घिसाव न दिखे, वे ढीले न हो जाएं, या किसी और तरह से खराब न हो जाएं।

आखिरी बातें

जैसे ही आपको दांतों में सड़न दिखे, सही इलाज के लिए अपने डेंटिस्ट के पास जाएं।

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