मेडिकल भाषा में फ्रोजन शोल्डर एक ऐसी कंडीशन है जिसमें कंधा दर्द करने लगता है और अकड़ जाता है। समय के साथ, कंधे का मूवमेंट कम हो जाता है, जिससे कभी-कभी जोड़ लगभग ‘फ्रोजन’ हो जाता है और चलने-फिरने में काफी कमी आ जाती है।

यह कंडीशन अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है, और हर गुजरते दिन के साथ, शेल्फ तक पहुंचने, कपड़े पहनने या अफेक्टेड साइड पर सोने जैसे रोज़ के आसान काम भी बहुत मुश्किल हो जाते हैं।

इस आर्टिकल में, हमने फ्रोजन शोल्डर के संकेत और रिस्क फैक्टर के बारे में बताया है।

फ्रोजन शोल्डर के खास संकेत

👉कंधे में अकड़न:

अफेक्टेडनेस आमतौर पर एक बार में एक कंधे पर असर डालती है, जिससे जोड़ को आसानी से हिलाना मुश्किल हो जाता है।

👉बहुत ज़्यादा दर्द:

दर्द अक्सर कंधे के आस-पास होता है और रात में बहुत ज़्यादा हो सकता है, खासकर जब अफेक्टेड साइड पर लेटते हैं। यह तकलीफ नींद में खलल डाल सकती है और आराम करना मुश्किल बना सकती है।

👉मूवमेंट की सीमित रेंज:

सिर के ऊपर हाथ डालना, शर्ट अंदर करना, या ब्रा पहनना जैसी आसान एक्टिविटी भी कंधे के मूवमेंट में कमी की वजह से मुश्किल हो जाती हैं।

👉रोज़ाना की एक्टिविटी पर असर:

लक्षणों की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि डोमिनेंट या नॉन-डोमिनेंट शोल्डर पर असर पड़ा है, जिससे विकलांगता के अलग-अलग लेवल हो सकते हैं।

फ्रोजन शोल्डर के रिस्क फैक्टर

️उम्र और जेंडर:

फ्रोजन शोल्डर 40 से 60 साल की उम्र के लोगों में सबसे आम है, और पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह ज़्यादा होता है।

☑️लंबे समय तक कंधे का स्थिर रहना:

चोट, सर्जरी या फ्रैक्चर की वजह से कंधे को लंबे समय तक स्थिर रखने से फ्रोजन शोल्डर हो सकता है। इसीलिए कंधे की सर्जरी से ठीक हो रहे मरीज़ों को अक्सर जल्दी फिजिकल थेरेपी शुरू करने की सलाह दी जाती है।

☑️ पुरानी हेल्थ कंडीशन:

कुछ मेडिकल कंडीशन, जैसे डायबिटीज, हाइपोथायरायडिज्म, हाइपरथायरायडिज्म, कार्डियोवैस्कुलर बीमारी और पार्किंसंस बीमारी, एडहेसिव कैप्सूलाइटिस का खतरा बढ़ाती हैं। खास तौर पर, डायबिटीज वाले लोगों में यह कंडीशन होने का खतरा ज़्यादा होता है, और ऐसे मामलों में यह और भी गंभीर हो सकता है।

️कंधे की पिछली समस्याएं:

कंधे की समस्याओं का इतिहास, जैसे रोटेटर कफ इंजरी या बर्साइटिस, बाद में फ्रोजन शोल्डर होने का खतरा बढ़ा सकते हैं।

️सुस्त लाइफस्टाइल:

फिजिकल एक्टिविटी की कमी और सुस्त व्यवहार जोड़ों में अकड़न पैदा कर सकते हैं, जिससे शोल्डर कैप्सूल के टाइट होने और मूवमेंट में रुकावट आने की संभावना बढ़ जाती है।

️ऑटोइम्यून और सूजन वाली स्थितियां:

ऐसी स्थितियां जो पुरानी सूजन को ट्रिगर करती हैं, उनसे शोल्डर कैप्सूल पर निशान और मोटाई भी पड़ सकती है, जिससे फ्रोजन शोल्डर का खतरा बढ़ जाता है।

आखिरी बातें

जब आपको फ्रोजन शोल्डर के लक्षण दिखें, तो शुरुआती स्टेज में इसका इलाज करवाने के लिए अपने डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लें।

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