लंग कैंसर दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों के मुख्य कारणों में से एक है, इसलिए इसके लक्षणों और कारणों के बारे में जानकारी होना बहुत ज़रूरी है।

जल्दी पता चलने से इलाज के नतीजे और बचने की दर में काफ़ी सुधार होता है। चेतावनी के संकेतों को पहचानने और जोखिम के कारणों को समझने से लोगों को समय पर मेडिकल मदद लेने में मदद मिल सकती है।

इस आर्टिकल में, हम लंग कैंसर के लक्षणों और कारणों के बारे में जानेंगे।

लंग कैंसर के खास लक्षण

️सांस से जुड़े लक्षण:

सांस लेने के सिस्टम में बदलाव लंग कैंसर के सबसे आम लक्षणों में से हैं। कई हफ़्तों तक लगातार खांसी, जिसमें कभी-कभी खून भी आ सकता है, किसी अंदरूनी हेल्थ प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है।

रोज़मर्रा के कामों के दौरान सांस लेने में तकलीफ़ और बिना किसी वजह के घरघराहट या आवाज़ में बदलाव भी एयरवे में दिक्कत का संकेत दे सकते हैं।

️शरीर के आम लक्षण:

लंग कैंसर फेफड़ों के अलावा, पूरी हेल्थ पर भी असर डाल सकता है। अचानक और बिना वजह वज़न कम होना, लगातार थकान और कमज़ोरी जो रोज़ाना के काम पर असर डालती है, ये खास लक्षण हैं।

ब्रोंकाइटिस या निमोनिया सहित बार-बार सीने में इन्फेक्शन होना इस बात का संकेत हो सकता है कि असामान्य सेल ग्रोथ की वजह से फेफड़े खराब हो रहे हैं।

️एडवांस्ड लक्षण:

जैसे-जैसे फेफड़ों का कैंसर बढ़ता है, और भी गंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं। अगर कैंसर फेफड़ों से बाहर फैलता है, तो हड्डियों में दर्द, सिरदर्द और न्यूरोलॉजिकल बदलाव हो सकते हैं।

ट्यूमर ग्रोथ की वजह से प्रमुख नसों में रुकावट के कारण चेहरे या गर्दन में सूजन भी देखी जा सकती है।

फेफड़ों के कैंसर के कारण

👉स्मोकिंग और तंबाकू का इस्तेमाल:

सिगरेट पीना फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण है, जो ज़्यादातर मामलों के लिए ज़िम्मेदार है। तंबाकू में मौजूद कार्सिनोजेन फेफड़ों के टिशू को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। यहां तक ​​कि पैसिव स्मोकिंग, या सेकंड-हैंड धुएं के संपर्क में आने से भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, खासकर लंबे समय तक संपर्क में रहने पर।

👉एनवायरनमेंटल और ऑक्यूपेशनल एक्सपोजर:

एस्बेस्टस और कुछ इंडस्ट्रियल केमिकल जैसे हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।  एयर पॉल्यूशन भी रिस्क बढ़ा सकता है, हालांकि इसके कारण और वजहों पर अभी भी स्टडी की जा रही है।

👉लाइफस्टाइल और दूसरे रिस्क फैक्टर:

पहले से मौजूद फेफड़ों की बीमारियां, जैसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), साथ ही खराब डाइट या फिजिकल इनएक्टिविटी, खतरा बढ़ा सकती हैं।

आखिरी विचार

हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखने से रिस्क कम हो सकता है, लेकिन इससे लंग कैंसर होने का चांस खत्म नहीं होता। जब आपको ऊपर बताए गए लक्षण दिखें तो सही डायग्नोसिस के लिए डॉक्टर को दिखाएं।

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