मर्म चिकित्सा आयुर्वेद की एक प्राचीन और अद्वितीय विधा है, जो शरीर के 107 विशिष्ट ऊर्जा केंद्रों (मर्म बिंदुओं) को हल्का दबाव देकर उत्तेजित करती है। यह पद्धति बाधित ऊर्जा को मुक्त कर, स्व-चिकित्सा (self-healing) क्षमता को सक्रिय करती है, जिससे तनाव, दर्द, और पुरानी बीमारियों का इलाज बिना किसी दवा या यंत्र के, सिर्फ हाथों के स्पर्श से किया जाता है।

 

मर्म चिकित्सा के मुख्य पहलू:

मर्म स्थान: मर्म शरीर के वे स्थान हैं जहाँ माँसपेशियाँ, नसें, हड्डियाँ, जोड़ या अस्थिबंध मिलते हैं। ये ‘प्राण’ के मुख्य केंद्र हैं।

कार्यविधि: उंगलियों या अंगूठे से इन बिंदुओं को एक निश्चित तरीके से दबाकर स्टिमुलेट (stimulate) किया जाता है।

स्वास्थ्य लाभ: यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है, हार्मोन को संतुलित करता है, दर्द से राहत देता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

उपयोग: यह विशेष रूप से गर्दन, पीठ, कमर, जोड़ों के दर्द और स्टिफनेस में बेहद कारगर है।

सावधानी: शरीर में 37 मर्म बिंदु गले से ऊपर होते हैं, जिन्हें केवल विशेषज्ञ की देखरेख में ही दबाना चाहिए।
यह चिकित्सा शरीर और मन को पुनर्जीवित (rejuvenate) करने और रोगों की रोकथाम के लिए एक अत्यंत प्रभावी उपचार प्रक्रिया है।

खास बात :
मर्म चिकित्सा वास्तव में अपने अंदर की शक्ति को पहचानने जैसा है। शरीर की स्वचिकित्सा शक्ति ही मर्म चिकित्सा है। मर्म चिकित्सा से सबसे पहले शांति व आत्म नियंत्रण आता है और सुख का अहसास होता है। शरीर में 107 मर्म स्थान हैं, जिनसे मेडिकल के छात्रों को उपचार व सर्जरी के दौरान बचाने की सीख दी जाती है।

By AMRITA

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