भारत में चावल सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की थाली का अहम हिस्सा है। फिर भी आज के समय में चावल को लेकर डर, भ्रम और अपराधबोध बहुत आम हो गया है। कभी कहा जाता है कि चावल मोटापा बढ़ाता है, कभी डायबिटीज का कारण बताया जाता है, तो कभी हार्मोनल समस्याओं से जोड़ा जाता है।चावल नहीं, बल्कि उसे पकाने का तरीका और हमारी पाचन शक्ति है।
आयुर्वेद कभी भी चावल को गलत नहीं मानता। वह भोजन को शरीर की अग्नि (digestive fire), मौसम और जीवनशैली के अनुसार देखने की सलाह देता है। यही कारण है कि एक ही चावल जब उबालकर छाना जाता है तो वह हल्का और सुपाच्य बनता है, जबकि प्रेशर कुकर में पकाया गया वही चावल भारी और ज्यादा ऊर्जा देने वाला हो जाता है। इसलिए चावल छोड़ने के बजाय यह समझना जरूरी है कि कौन-सा तरीका आपके शरीर के लिए सही है, ताकि सेहत बनी रहे और डर के बिना भोजन का आनंद लिया जा सके।
1 :उबला हुआ चावल (Boiled & Drained Rice)
इस विधि में चावल को ज्यादा पानी में उबालकर अतिरिक्त पानी निकाल दिया जाता है।
इसके फायदे :अतिरिक्त स्टार्च निकल जाता है।
चावल हल्का और सुपाच्य बनता है।
ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता।
गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग में राहत।
गर्मी में शरीर को ठंडक देता है।
किसे उबला चावल खाना चाहिए
डायबिटीज से जूझ रहे लोग, PCOS और हार्मोनल इम्बैलेंस।
जिनको गैस, एसिडिटी या भारीपन की शिकायत।
गर्म मौसम में या फिर पित्त और कफ प्रकृति वाले लोग।
2. प्रेशर कुकर में पका चावल
इस तरीके में चावल सारा पानी सोख लेता है जिससे वह ज्यादा नरम और भारी हो जाता है।
ज्यादा एनर्जी देता है।
लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है
बच्चों और बुजुर्गों के लिए नरम
मेहनत वाले काम करने वालों के लिए उपयोगी।
किसे प्रेशर कुकर वाला चावल चुनना चाहिए
जिनकी पाचन शक्ति मजबूत हो, फिजिकली एक्टिव लोग।
बच्चे और बुजुर्ग, कभी-कभी कंफर्ट फूड के रूप में।
हालांकि कमजोर पाचन वालों में यह सुस्ती, गैस या भारीपन बढ़ा सकता है।
