शरीर को हेल्दी रखने के लिए विटामिंस से लेकर मिनरल्स तक की जरूरत पड़ती है. सारे विटामिन में जो एक विटामिन शरीर को सेहतमंद रखने में बड़ा रोल निभाता है वो विटामिन डी है. विटामिन डी हमारी हड्डियों, दांतों और इम्यून सिस्टम के लिए बहुत जरूरी होता है.

ऐसे में शरीर में इसकी कमी नहीं होने देनी चाहिए, लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि इसका ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है.

लगातार और जरूरत से ज्यादा विटामिन डी लेने से आपकी किडनी तक पर बुरा असर पड़ सकता है. बहुत लोग धूप कम मिलने या सेहत ठीक रखने के लिए विटामिन डी की गोलियां लेते हैं. लेकिन अक्सर लोग इसकी जरूरत से ज्यादा खुराक ले लेते हैं, जो उनकी सेहत को सुधारने के बजाय बिगाड़ने का काम करती हैं. अगर आप भी उन्हीं में से जो बिना सोचे समझे विटामिन डी की गोलियां लिए जा रहे हैं तो सतर्क हो जाएं आखिर विटामिन डी कितनी मात्रा में लेना चाहिए और अगर ज्यादा खा लिया जाए तो शरीर में क्या-क्या नुकसान होते हैं.

 

 विटामिन डी जरूरी है, लेकिन कितना? 

ज्यादातर लोगों को रोजाना थोड़ी मात्रा में ही विटामिन डी की जरूरत होती है. किडनी एक्सपर्ट डॉ. नवीनाथ एम के अनुसार, लोगों को करीब 400 से 1,000 IU तक विटामिन डी एक दिन में जरूरत होती है. लेकिन अगर कोई रोज 4,000 IU से ज्यादा या कई महीनों तक 8,000-12,000 IU लेता रहे, तो ये सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है.

 

कुछ लोग अनजाने में रोज 60,000 IU वाली गोली खा लेते हैं, जो बहुत ज्यादा मात्रा होती है. इससे खून में कैल्शियम बढ़ जाता है, जिसे हाइपरकैल्सीमिया कहा जाता है. ऐसा होने पर किडनी पर ज्यादा दबाव पड़ता है और वो खराब भी हो सकती है.

 

ज्यादा विटामिन डी किडनी को कैसे पहुंचाता है नुकसान?

शरीर में विटामिन डी की ज्यादा मात्रा आपकी किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकती है. जब किडनी को लंबे समय तक खून से एक्स्ट्रा कैल्शियम निकालना पड़ता है, तो ये कैल्शियम किडनी में जमा होने लगता है. धीरे-धीरे इससे किडनी की पथरी बनने लगती है. इसके साथ ही किडनी में कैल्शियम भी जमा हो जाता है और किडनी के अंदर मौजूद छोटे फिल्टरों को नुकसान भी पहुंचता है. अगर कंडीशन बहुत गंभीर हो जाए, तो किडनी फेल भी हो सकती है.

 

विटामिन डी ओवरडोज के लक्षण

विटामिन डी शरीर में ज्यादा होने पर उसके लक्षण हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देते हैं. लेकिन जब ये लक्षण दिखाई दे तो सचेत होना जरूरी है.

लक्षण

मतली और उल्टी

बहुत प्यास लगना

बार-बार पेशाब आना

मसल्स में कमजोरी

भ्रम या हद से ज्यादा थकान

पीठ के निचले हिस्से या बगल में दर्द (किडनी का दर्द)

 

इन लक्षणों के साथ ही अगर विटामिन डी के कारण किडनी बुरी तरह से डैमेज होने लगे, तो किडनी फेलियर के लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. इनमें पैरों में सूजन, थकान और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं.

 

विटामिन डी ओवरडोज से कैसे बचें?

शरीर में विटामिन डी का ओवरडोज आमतौर पर तब होता है जब लोग बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट लेने लगते हैं, ऐसे कई प्रोडक्ट्स साथ में इस्तेमाल करते हैं जिनमें विटामिन डी होता है या फिर बिना देखरेख के ज्यादा डोज वाले इंजेक्शन लगवा लेते हैं. इससे बचने के लिए, विटामिन डी हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लें और उनकी बताई हुई खुराक से ज्यादा न लें. अगर आपको लंबे समय तक सप्लीमेंट लेना है, तो समय-समय पर खून की जांच करवाते रहें ताकि विटामिन डी और कैल्शियम का लेवल ठीक बना रहे और कोई नुकसान न हो.

By AMRITA

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