
आजकल सोशल मीडिया पर एक पोस्ट खूब चर्चा में है जिसमें दावा किया गया है कि किसिंग या ओरल इंटिमेसी की वजह से कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और यह खतरा तंबाकू से भी ज्यादा हो गया है. पोस्ट में थ्रोट कैंसर का जिक्र है और नए शोध का हवाला दिया गया है.
लेकिन ये पूरी तरह सच नहीं है। गलतफहमियों से बचने के लिए इसकी सच्चाई समझना जरूरी है क्योंकि आधा सच आसानी से गलतफहमी फैला सकता है.
वास्तविक वैज्ञानिक तथ्य यह है कि कई उच्च-आय वाले देशों में ऑरोफैरिंक्स (गले के पिछले हिस्से, टॉन्सिल और जीभ के आधार) के कैंसर के मामले अब धूम्रपान से जुड़े मामलों से ज्यादा HPV यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से जुड़े पाए जा रहे हैं. खासकर HPV-16 नामक हाई-रिस्क टाइप. HPV मुख्य रूप से यौन संपर्क से फैलता है. ओरल इंटिमेसी के जरिए भी यह वायरस मुंह और गले में पहुंच सकता है. अगर कोई व्यक्ति हाई-रिस्क HPV से संक्रमित हो और संक्रमण लंबे समय तक बना रहे तो कुछ मामलों में यह कैंसर का रूप ले सकता है. हालांकि ज्यादातर लोग जो HPV संक्रमण लेते हैं उनमें कभी कैंसर नहीं होता. शरीर का इम्यून सिस्टम आमतौर पर वायरस को खुद साफ कर देता है.
संक्रमित ओरल सेक्स बन रहा है मुख्य खतरा
यहां साफ समझ लें कि साधारण किसिंग (होंठों का चुंबन) से HPV फैलने का जोखिम बहुत कम माना जाता है. मुख्य जोखिम ओरल सेक्स या गहरे ओरल संपर्क से जुड़ा है. सोशल मीडिया पोस्ट में “किसिंग” शब्द का इस्तेमाल करके बात को ज्यादा सनसनीखेज बना दिया गया है जबकि असल मुद्दा HPV संक्रमण है. तंबाकू अभी भी कई तरह के कैंसर (फेफड़े, मुंह, गला आदि) का बड़ा कारण है. लेकिन कुछ देशों में ऑरोफैरिंक्स कैंसर के लिए HPV अब प्रमुख कारक बन गया है. यह बदलाव मुख्य रूप से युवा और मध्यम आयु वर्ग में देखा जा रहा है जहां धूम्रपान कम हुआ है लेकिन HPV एक्सपोजर बढ़ा है.
कैसे करें बचाव
सबसे प्रभावी बचाव HPV वैक्सीन है. यह वैक्सीन हाई-रिस्क HPV टाइप्स से सुरक्षा प्रदान करती है और कैंसर के जोखिम को काफी कम कर देती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन और कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां किशोरों और युवाओं को वैक्सीन लगाने की जोरदार सलाह देती हैं. जितनी जल्दी वैक्सीन लगे उतना बेहतर, क्योंकि यह संक्रमण से पहले सबसे ज्यादा असरदार होती है. अन्य बचाव उपाय भी महत्वपूर्ण हैं:
♦ तंबाकू का सेवन पूरी तरह छोड़ दें.
♦ शराब का अधिक सेवन सीमित करें क्योंकि यह भी जोखिम बढ़ाता है.
♦ नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं. अगर लंबे समय तक गले में दर्द, निगलने में तकलीफ, आवाज में बदलाव या गर्दन में गांठ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.
♦सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाएं.
