
मॉनसून में इम्युनिटी कमजोर हो जाती है और वात दोष भी बढ़ जाता है, जिससे वायरल बुखार, फूड प्वाइजनिंग और इन्फेक्शन का जोखिम ज्यादा रहता है। ऐसे में खान- पान और साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।हम आपको बताएंगे कि मॉनसून में क्या खाया जाना चाहिए और किन चीजों से सख्त परहेज करना चाहिए।
बारिश के मौसम में लिए कैसा हो भोजन ?
बरसात में सादा, गर्म और आसानी से पचने वाले खाने को डाइट में शामिल करनी चाहिए, इसके लिए कई चीजों से परहेज भी किया जाना जरूरी है।
क्या खाना चाहिए?
♣ बारिश के मौसम में पुराने अनाज जैसे- चावल, गेहूं और जौ खाने से पाचन अच्छा रहता है।
♣ मूंग की दाल खाना फायदेमंद होता है क्योंकि यह तीनों दोषों- वात, पित्त और कफ तीनों को बैलेंस करने के लिए जानी जाती है। वहीं, यह दाल ब्लोटिंग और एसिडिटी जैसी पेट से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने में भी मददगार है।
♣ आयुर्वेद के अनुसार मॉनसून में पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है और इस समस्या से निपटने के लिए खाने में उबली हुई सब्जियों को ही शामिल किया जाना चाहिए। उबला और हल्का खाना सबसे बेस्ट माना गया है।
♣ घी और तेल जैसी चिकनाई वाली चीजें वात दोष को शांत कर सकती हैं।
♣ खट्टी, नमकीन और तीखी चीजों को खाना भी इस मौसम में असरदार बताया गया है।
क्या नहीं खाना चाहिए?
♣ हरी पत्तेदार सब्जियां बरसात में बिल्कुल नहीं खानी चाहिए। इस मौसम में पत्तेदार सब्जियों में बैक्टीरिया और कीड़े जल्दी पनपते हैं।
♣ दूध और दूध से बनी चीजों से सख्त परहेज करें। इनके सेवन से कफ और पित्त दोष बढ़ता है।
♣फर्मेन्टड चीजों को भी कम से कम शामिल करें, ये पेट से जुड़ी दिक्कतों को बढ़ाकर पित्त दोष अशांत करती हैं।
♣ डीप फ्राइड और जंक फूड्स कफ दोष बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
♣ इस मौसम में कच्ची सलाद खाने से भी बचना चाहिए, इनमें भी बैक्टीरिया और वायरस का खतरा रहता है।
