
भारत में नॉनवेज फूड लवर्स की कमी नहीं है और यही कारण है कि घर हो या रेस्टोरेंट नॉनवेज फूड के कई डिलीसियस आइटम अब तक खोजे और पसंद किये जा चुके हैं.अगर आप भी नॉनवेज फूड के शौकीन हैं तो बारिश के मौसम में थोड़ा परहेज और सावधानी जरूर रखें.

बारिश के मौसम में नॉनवेज खाने से क्यों जरूर है दूरी?
बारिश में नॉनवेज खाने से पाचन तंत्र कमजोर होने पर अपच, फूड पॉयजनिंग और पेट के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। नमी के कारण मांस में साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं। इसके अलावा, मानसून सी-फूड (मछली) का प्रजनन काल होता है, जिससे दूषित पानी और केमिकल पेट में जाने की संभावना रहती है।
बारिश के मौसम में नॉनवेज से नुकसान :
फूड पॉयजनिंग का खतरा: बारिश के मौसम में हवा में नमी और उच्च तापमान होता है, जो बैक्टीरिया और वायरस के पनपने के लिए अनुकूल होता है। ऐसे में मांस, मछली और अंडे बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं और इन्हें खाने से गंभीर फूड पॉयजनिंग हो सकती है।
कमजोर पाचन तंत्र: आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। नॉनवेज पचने में भारी होता है, जिसे खाने से गैस, एसिडिटी और पेट दर्द की समस्या हो सकती है।
सी-फूड (समुद्री भोजन): मानसून मछलियों और झींगा जैसे जीवों का प्रजनन काल होता है। इस दौरान दूषित पानी और कीचड़ के कारण मछलियां जहरीली या प्रदूषित हो सकती हैं, जिसे खाने से डायरिया और पीलिया का खतरा होता है।
स्ट्रीट फूड और हाइजीन की समस्या: बारिश के दिनों में बाहर के स्टॉल या सड़क किनारे मिलने वाले नॉनवेज में साफ-सफाई की कमी हो सकती है। खुला और ठीक से न पका हुआ मांस बीमारियों का मुख्य कारण बन सकता है।
परामर्श:
अगर आप बारिश में नॉनवेज खाना ही चाहते हैं, तो हमेशा ताजा पका हुआ और साफ-सुथरा भोजन ही करें। हालांकि, बेहतर स्वास्थ्य के लिए इस मौसम में शाकाहारी और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों (जैसे- दालें, सूप, मौसमी फल) का ही चयन करना चाहिए।
