
नवजात शिशु की देखभाल बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।हर मौसम में अलग-अलग तरीके से उनकी देखरेख करनी पड़ती है।सर्दियों में उनके विशेष मालिश, धूप सेकना और रूम को गर्म रखने के साथ ही उनके शरीर का तापमान मेंटेन रखना भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी हो जाती है। ऐसे ही गर्मियों के मौसम में भी कमरे का तापमान सही रखना उनके शरीर के तापमान के हिसाब से उनका कपड़ा और एसी, कूलर या पंखे को सही स्पीड में चलना भी एक बहुत बड़ा टास्क हो जाता है।
कोई कहता है बच्चे के सामने ठंडी हवा मत चलाओ, कोई कहता है गर्मी से ज्यादा खतरा है। ऐसे में नई मां अक्सर समझ नहीं पाती कि आखिर सही क्या है। कई घरों में तो ठंडी हवा चलाने को लेकर छोटी-सी बहस भी हो जाती है।
अगर आपके घर में भी हाल ही में बच्चा हुआ है और आप इसी उलझन में हैं, तो आइए सही जानकारी साझा करते हैं।
दरअसल समस्या ठंडी हवा नहीं, बल्कि उसका गलत इस्तेमाल है। असल खतरा ठंडी हवा नहीं, जरूरत से ज्यादा गर्मी भी हो सकती है।
अक्सर लोग बच्चे को गर्म रखने के चक्कर में कमरे को बहुत गर्म बना देते हैं। लेकिन बहुत ज्यादा गर्म माहौल भी बच्चे को परेशान कर सकता है। जरा सोचिए न जब बड़े लोग ही गर्मी में बेचैन हो जाते हैं, तो एक नवजात शिशु कितना असहज महसूस करता होगा।
ज्यादा गर्मी के कारण बच्चे को चिड़चिड़ापन, बेचैनी और नींद की परेशानी भी हो सकती है। यही वजह है कि आरामदायक तापमान बनाए रखना जरूरी है।
कमरे का तापमान रखें सही
डॉक्टरों के अनुसार कमरे को बहुत ज्यादा ठंडा बनाने की जरूरत नहीं होती। करीब 24-26 डिग्री का तापमान आमतौर पर सही माना जाता है। इस तापमान पर बच्चा भी सहज महसूस करेगा और मां को भी गर्मी से राहत मिल जाएगी।
सबसे बड़ी गलती जो कई लोग कर बैठते हैं। असल में ठंडी हवा समस्या नहीं है, प्रॉब्लम तब होती है जब हवा सीधे बच्चे के चेहरे या शरीर पर पड़ने लगे। अगर पालना या बिस्तर बिल्कुल हवा के सामने रखा है, तो उसे थोड़ा दूरी पर दूसरी जगह कर दें।
कमरा ठंडा रहे, लेकिन हवा सीधे बच्चे तक ना पहुंचे। यही सबसे आसान और जरूरी नियम है।
नई मां के लिए भी जरूरी है आरामदायक माहौल
बच्चे की देखभाल में अक्सर मां की जरूरतों को इग्नोर कर दिया जाता है। लेकिन प्रसव के बाद मां का शरीर भी आराम और अच्छी नींद मांगता है।
अगर कमरा बहुत गर्म होगा, तो मां की थकान और बेचैनी बढ़ सकती है इसलिए आरामदायक तापमान सिर्फ बच्चे के लिए नहीं, मां के लिए भी जरूरी है।
