गर्मियों के मौसम में पसीना आना और थकान महसूस होना आम बात है, लेकिन कुछ लोगों को हल्की गर्मी भी असहनीय लगने लगती है। थोड़ी देर धूप में रहने पर कुछ लोगों को चक्कर आना, बेचैनी, ज्यादा पसीना, सिरदर्द, कमजोरी और दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

यह केवल मौसम का असर नहीं बल्कि किसी मेडिकल कंडीशन का संकेत भी हो सकता है। शरीर का तापमान कंट्रोल करने की क्षमता जब प्रभावित होने लगती है, तब व्यक्ति हीट सेंसिटिव यानी गर्मी के प्रति ज्यादा सेंसिटिव हो जाता है। यह समस्या कई बार हार्मोनल गड़बड़ी, थायराइड, डिहाइड्रेशन या नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों के कारण भी हो सकती है।

 

बीमारियां जो गर्मी के प्रति सेंसिटिव बनाती है?

 

कुछ बीमारियां जैसे , मल्टीपल स्क्लेरोसिस, डिहाइड्रेशन और नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्याएं सहने की क्षमता को कम कर सकती हैं। इसके अलावा कुछ दवाइयों का असर भी शरीर को जल्दी गर्म महसूस करा सकता है।

 

1. हाइपरथायरायडिज्म

 

हाइपरथायरायडिज्म ऐसी स्थिति है जिसमें थायराइड ग्लैंड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म बहुत तेज हो जाता है और व्यक्ति को सामान्य तापमान भी बहुत गर्म महसूस होने लगता है। ऐसे लोगों को ज्यादा पसीना आता है, दिल की धड़कन बढ़ जाती है, वजन तेजी से घटने लगता है और बेचैनी महसूस होती है।

 

2. मल्टीपल स्क्लेरोसिस और नर्वस सिस्टम की समस्याएं

 

कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी शरीर की गर्मी सहन करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) ऐसी ही एक बीमारी है जिसमें मस्तिष्क और नसों के बीच संदेश पहुंचाने वाली प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। एमएस के मरीजों को हल्की गर्मी में भी थकान, धुंधला दिखाई देना और कमजोरी महसूस होने लगती है। शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ते ही उनके लक्षण गंभीर हो सकते हैं। इसके अलावा ऑटोनोमिक नर्व डिसऑर्डर जैसी स्थितियों में भी शरीर सही तरीके से तापमान कंट्रोल नहीं कर पाता।

 

3. डायबिटीज, हार्ट डिजीज और मोटापा

 

डायबिटीज और हार्ट डिजीज भी शरीर की तापमान कंट्रोल करने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। डायबिटीज में नसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे शरीर को ठंडा रखने की क्षमता कम हो जाती है। वहीं में ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होने के कारण शरीर सही तरह से गर्मी बाहर नहीं निकाल पाता।

 

4. कुछ दवाइयां का सेवन

 

यानी डिहाइड्रेशन भी हीट सेंसिटिविटी का बड़ा कारण बन सकता है। जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता तो पसीना सही तरीके से नहीं निकल पाता और शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। इसके अलावा कुछ दवाएं भी शरीर के कूलिंग सिस्टम को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में मरीज को ज्यादा गर्मी महसूस होने लगती है। यदि किसी दवा के सेवन के बाद गर्मी असहनीय लगने लगे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

 

खास परामर्श

हीट सेंसिटिव लोगों को दिन के सबसे गर्म समय यानी दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बार-बार चक्कर आना, उल्टी, ज्यादा कमजोरी या सांस लेने में परेशानी हो रही हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यह हीट एक्सॉशन या हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।

 

गर्मियों में ज्यादा गर्मी, चक्कर आना या कमजोरी महसूस होना सिर्फ मौसम का प्रभाव नहीं, बल्कि हाइपरथायरायडिज्म या मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है। शरीर का तापमान कंट्रोल न हो पाने और डिहाइड्रेशन के कारण यह समस्या बढ़ती है। दोपहर की तेज धूप से बचकर और भरपूर पानी पीकर इससे बचाव किया जा सकता है। लक्षणों के गंभीर होने या दवाइयों के साइड इफेक्ट दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।

By AMRITA

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