आज के समय में पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे गैस, एसिडिटी, अपच, कब्ज या पेट दर्द काफी आम हो गई हैं। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ गलत खान-पान का असर मानते हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसका संबंध ग्रहों की स्थिति से भी होता है।

जब कुंडली में कुछ ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति में होते हैं, तो उनका सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि किसी भी बीमारी में दवाई और सही खान-पान सबसे पहले जरूरी होता है, लेकिन ज्योतिषीय उपाय इसमें सहायक भूमिका निभाते हैं। इसके प्रभाव को अधिक कर देता है।

 

 

वो ग्रह जिनसे जुड़ी हैं पेट की बीमारियां

 

ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति को पाचन तंत्र, लिवर और पेट से जुड़ा मुख्य ग्रह माना जाता है। अगर बृहस्पति कमजोर हो जाए, तो गैस, अपच, लीवर से जुड़ी समस्या और पेट में सूजन जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

सूर्य को शरीर की पाचन अग्नि का कारक माना जाता है, इसलिए इसके अशुभ होने पर एसिडिटी, जलन और भूख से जुड़ी समस्या हो सकती है।

बुध का संबंध आंतों और पाचन की गति से होता है, इसलिए इसके कमजोर होने पर कब्ज, पेट में ऐंठन और अनियमित पाचन देखने को मिलता है।

राहु और केतु अचानक होने वाली पेट की समस्याओं, अल्सर या ऐसी परेशानियों से जुड़े होते हैं जिनका कारण तुरंत समझ में नहीं आता।

शनि का प्रभाव लंबे समय तक चलने वाली या बार-बार होने वाली पेट की समस्या से जुड़ा होता है।

इसके अलावा कुंडली का छठा भाव रोगों का स्थान माना जाता है। अगर इस भाव में पाप ग्रह हों या यह कमजोर हो, तो व्यक्ति को पेट से जुड़ी दिक्कतें ज्यादा परेशान कर सकती हैं।

 

 

दवाई के बाद भी नहीं मिलता पूरा आराम

 

अगर बार-बार दवा लेने के बाद भी राहत नहीं मिल रही, पेट हमेशा भारी रहता है, गैस और एसिडिटी बार-बार हो रही है या बिना कारण पाचन खराब रहता है, तो ज्योतिष के अनुसार यह ग्रहों के अशुभ प्रभाव का संकेत हो सकता है। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

 

 

दवाई के साथ करें ये ज्योतिषीय उपाय

 

सूर्य को मजबूत करने के लिए रोज सुबह तांबे के पात्र में जल भरकर सूर्य को अर्घ्य देना लाभकारी माना जाता है। इससे शरीर की पाचन शक्ति बेहतर होती है और एसिडिटी जैसी समस्या में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिलता है। यह उपाय नियमित रूप से करने पर शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बढ़ता है।

 

बृहस्पति को मजबूत करने के लिए गुरुवार के दिन केसर का तिलक लगाना या हल्दी का सेवन करना अच्छा माना जाता है। यदि किसी को ज्यादा परेशानी हो, तो ज्योतिषी की सलाह लेकर पुखराज धारण किया जा सकता है। इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और लिवर से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।

 

बुध को संतुलित करने के लिए भगवान विष्णु की पूजा करना और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना लाभकारी माना गया है। यह उपाय आंतों की कार्यप्रणाली को संतुलित करने में मदद करता है और पेट दर्द या ऐंठन जैसी समस्याओं में सुधार ला सकता है।

 

♣ राहु और केतु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए समय-समय पर दान करना अच्छा माना जाता है। हरी सब्जियां, अनाज या जरूरतमंदों को भोजन कराना इन ग्रहों को शांत करता है। इससे अचानक होने वाली पेट की समस्याओं में कमी आ सकती है।

 

शनि के प्रभाव को कम करने के लिए शनिवार के दिन सरसों के तेल का दीपक जलाना और गरीबों की सहायता करना लाभकारी माना जाता है। यह उपाय लंबे समय तक चलने वाली पेट की समस्या में राहत देने में सहायक हो सकता है।

 

 

जीवनशैली में भी ये बदलाव हैं जरूरी

 

पेट की समस्या से बचने के लिए केवल उपाय ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों में सुधार करना भी बहुत जरूरी है। सुबह उठने के बाद लंबे समय तक खाली पेट नहीं रहना चाहिए, क्योंकि इससे एसिडिटी बढ़ सकती है। भोजन हमेशा हल्का और आसानी से पचने वाला होना चाहिए, ताकि पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव न पड़े।

 

तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना कम करने से पेट की परेशानी काफी हद तक कंट्रोल में रहती है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है, क्योंकि इससे शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और पाचन बेहतर होता है। इसके अलावा रोजाना हल्की वॉक या योग करने से पाचन क्रिया मजबूत होती है और गैस, कब्ज जैसी समस्याएं कम होती हैं।

 

By AMRITA

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