
आजकल ओब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD) के बढ़ते मामले वास्तव में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए एक चिंता का विषय हैं। यह एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है जो व्यक्ति के दैनिक जीवन, कामकाज और रिश्तों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
OCD के बढ़ते मामलों की मुख्य वजहें :
तनाव और अनिश्चितता: जीवन में बढ़ता तनाव, काम का बोझ और अनिश्चितता OCD के लक्षणों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कोरोनावायरस (COVID-19) का प्रभाव: महामारी के बाद से स्वच्छता को लेकर डर (Germophobia) और बार-बार हाथ धोने जैसे OCD के मामलों में काफी वृद्धि देखी गई है।
युवाओं में उच्च जोखिम: यह युवाओं में अधिक आम है, क्योंकि वे अक्सर लक्षणों को छिपाते हैं, जिससे निदान और उपचार में देरी होती है।
पहचान की कमी और सामाजिक धारणा: ओसीडी के लक्षण अक्सर “शर्मनाक” माने जाते हैं, जिससे लोग खुलकर बात नहीं करते और इलाज नहीं कराते।
मस्तिष्क रसायन विज्ञान: शोध बताते हैं कि यह मस्तिष्क में सेरोटोनिन (serotonin) नामक न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर में कमी और मस्तिष्क की संरचनात्मक अनियमितताओं से संबंधित है।
OCD के सामान्य लक्षण:
जुनून (Obsessions): बार-बार आने वाले अवांछित विचार, जैसे- रोगाणुओं का डर, चीजों को व्यवस्थित रखने की तीव्र इच्छा, या संदेह होना।
बाध्यता (Compulsions): डर को कम करने के लिए बार-बार एक ही व्यवहार दोहराना, जैसे- बार-बार हाथ धोना, दरवाज़े लॉक चेक करना, या मन ही मन गिनती करना।
उपचार और सुधार:
हालाँकि, सही समय पर निदान और उपचार से OCD को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके मुख्य उपचार हैं:
थेरेपी: एक्सपोजर एंड रिस्पॉन्स प्रिवेंशन (ERP) थेरेपी, जो संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT) का एक प्रकार है, बहुत प्रभावी है।
दवाइयाँ: कुछ विशेष अवसादरोधी दवाएं (SRIs) भी असरदार होती हैं।
यदि आपको या आपके किसी परिचित को ऐसे लक्षण महसूस हों, तो मनोवैज्ञानिक या मनोरोग विशेषज्ञ (Psychiatrist) से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है।
