
जब भी हमें कोई परेशानी होती है और वह परेशानी हमारे ऊपर हावी होने लगती है हमारी मानसिक स्थिरता बिगड़ जाती है। कई बार लोग डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं तो कई बार लोग एंजायटी की अवस्था में पहुंच जाते हैं वहीं कई बार लोग समझ ही नहीं पाते हैं कि उन्हें डिप्रेशन है या वह एंजायटी में चले गए हैं क्योंकि, एंजायटी और डिप्रेशन दोनों ही दो अलग-अलग मानसिक अस्वस्थता की परिस्थिति है।
♣ एंजायटी :
एंजायटी एक मेंटल डिसऑर्डर है. इसमें लोग फ्यूचर की अनिश्चितताओं को लेकर चिंता और डर में रहते हैं. इस दौरान लोगों में बेचैनी बनी रहती है. घबराहट, दिल की धड़कन का तेज होना, पसीना आना और नींद में समस्या आना. कई बार डर बिना भी एंजायटी महसूस हो कती है. एंजायटी की वजह से रोजाना की लाइफ में काम करने में दिक्कत आती है.
♣ डिप्रेशन
डिप्रेशन एक ऐसी स्थिति है, जब इंसान लंबे समय तक उदास और निराश महसूस करता है. ऐसे में इंसान को किसी चीज में इंट्रेस्ट नहीं रहता है. किसी भी काम में मन नहीं लगता है. इससे आत्मविश्वास कम हो जाता है. कई बार लाइफ में नकारात्मक विचार भी आने लगते हैं. डिप्रेशन केवल मूड की समस्या नहीं है यह सोच, व्यवहार और शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती हैं.
डिप्रेशन और एंजायटी में अंतर
एंजायटी और डिप्रेशन में यह अंतर है कि एंजायटी और डिप्रेशन में इंसान भविष्य की चिंता करता है. डिप्रेशन में इंसान अपनी वर्तमान की लाइफ से परेशान रहता है. एंजायटी में शरीर हाइपर एक्टिव होता है. वहीं डिप्रेशन में इंसान की एनर्जी कम हो जाती है.
कौन सी कंडीशन ज्यादा खतरनाक है
दोनों ही कंडीशन खतरनाक होती है. डिप्रेशन को ज्यादा गंभीर माना जाता है क्योंकि इस कंडीशन में इंसान को बहुत बुरे ख्याल आते हैं. कुछ केस में तो इंसान आत्महत्या जैसे विचार करने लगते हैं. एंजायटी में लंबे सय तक रहने से हार्ट डिजीज, नींद की समस्या और मानसिक थकान हो सकती है. इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इस कंडीशन से निजात पाने के लिए थेरेपी, काउंसलिंग और लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत है.
