
भारतीय महिलाओं में बच्चेदानी की गांठ या फाइब्रॉइड के बढ़ते मामले काफी गंभीर समस्या का रूप ले रहे हैं। ऐसे में महिलाओं और उनके परिवार को जागरूक रहने की आवश्यकता है।
बच्चेदानी (गर्भाशय) में फाइब्रॉइड (गांठ) गैर-कैंसरयुक्त ट्यूमर हैं, जिनके मुख्य कारणों में हार्मोनल असंतुलन (एस्ट्रोजन/प्रोजेस्टेरोन), जेनेटिक्स, और विटामिन D की कमी शामिल हैं। लक्षणों में भारी पीरियड्स, पेडू में दर्द, बार-बार पेशाब आना और कब्ज शामिल हैं। इलाज के तौर पर दर्द निवारक दवाएं, हार्मोनल थेरेपी, या सर्जरी (myomectomy/hysterectomy) की जाती है।
फाइब्रॉइड के मुख्य कारण:
हार्मोन: एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का उच्च स्तर, जो फाइब्रॉइड की वृद्धि को बढ़ावा देते हैं।
जेनेटिक्स: परिवार में किसी को फाइब्रॉइड होने का इतिहास।
जीवनशैली: अत्यधिक शराब, कैफीन, और विटामिन D की कमी।
उम्र: शुरुआती मासिक धर्म (कम उम्र में)।
फाइब्रॉइड के लक्षण:
भारी और लंबे पीरियड्स: पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना।
पेट में भारीपन: निचले पेट में सूजन या भारीपन महसूस होना।
दर्द: कमर के निचले हिस्से या पैरों में दर्द।
बार-बार पेशाब आना: मूत्राशय पर दबाव के कारण।
यौन संबंध में दर्द: शारीरिक संबंध बनाने में परेशानी और योनी में दर्द।
फाइब्रॉइड का इलाज:
दवाएं: दर्द कम करने के लिए NSAIDs (आइबुप्रोफेन) और ब्लीडिंग कम करने के लिए हार्मोनल गोलियां।
न्यूनतम आक्रामक प्रक्रियाएं: गर्भाशय धमनी एम्बोलिज़ेशन (UAE) या रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन, जो फाइब्रॉइड को सिकोड़ते हैं।
सर्जरी:
मायोमेक्टोमी (Myomectomy): केवल फाइब्रॉइड को निकालना।
हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy): पूरा गर्भाशय निकाल देना।
