गर्भावस्था हर महिला के लिए एक बहुत ही यादगार एहसास है। यह कई शारीरिक बदलाव और जिम्मेदारी से भरी एक सुनहरी यात्रा है, जिसमें महिलाओं के पोषण और स्वक्षता का विशेष महत्व है। अक्सर गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पोषण की कमी का सामना करना पड़ता है। आयरन, कैलशियम और विटामिनों की कमी कई बार माँ और बच्चे को संकट में डाल देता है।

 

आयरन एक आवश्यक पोषक तत्व है, जो गर्भवती महिलाओं के शरीर में खून की मात्रा को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने, भ्रूण और प्लेसेंटा को ऑक्सीजन पहुंचाने और एनीमिया से बचने के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए भी आयरन की पर्याप्त मात्रा की आवश्यकता होती है। यदि किसी गर्भवती महिला में आयरन की कमी होती है, तो इससे प्री-टर्म बर्थ, जन्म के समय बच्चे का कम वजन और प्रसवोत्तर थकान का खतरा बढ़ सकता है। इस संदर्भ में, यह जानना महत्वपूर्ण है कि गर्भावस्था के किस चरण में महिलाओं को सबसे अधिक आयरन की आवश्यकता होती है।

 

किस तिमाही में आयरन की अधिक आवश्यकता होती है?

 

गर्भावस्था के दौरान हर तिमाही में आयरन की आवश्यकता होती है, लेकिन तीसरी तिमाही में इसकी मांग सबसे अधिक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय महिलाओं को सामान्य से लगभग 50% अधिक (लगभग 27 mg प्रतिदिन) आयरन की आवश्यकता होती है, ताकि बच्चे का विकास सही तरीके से हो सके और शरीर में बढ़ते रक्त की पूर्ति हो सके। विशेष रूप से अंतिम हफ्तों में अतिरिक्त आयरन लेना अधिक लाभकारी होता है।

 

आखिरी तिमाही में आयरन के लाभ

 

♦ एनीमिया के जोखिम में कमी- गर्भावस्था की अंतिम तिमाही का मतलब है कि डिलीवरी कभी भी हो सकती है। यदि डिलीवरी के दौरान महिला को अत्यधिक रक्तस्राव होता है या गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी होती है, तो इससे एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है।

 

♦ डिलीवरी की तैयारी- आखिरी तिमाही में पर्याप्त आयरन का सेवन शरीर को डिलीवरी के लिए तैयार करता है। चाहे नॉर्मल डिलीवरी हो या सिजेरियन, दोनों ही स्थितियों में महिला के शरीर से रक्त बहता है। इसलिए आयरन का सेवन रक्त की मात्रा को बढ़ाता है, जो बाद में रिकवरी में सहायक होता है।

 

♦ शिशु के वजन पर प्रभाव- गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में उचित मात्रा में आयरन का सेवन बच्चे के मानसिक विकास को बेहतर बनाता है। इसके साथ ही, जन्म के समय बच्चे का वजन भी सही रहता है। यहां तक कि प्री-टर्म डिलीवरी का खतरा भी कम होता है।

By AMRITA

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